वजह गाजीपुर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित है। पूर्व सांसद की पत्नी को इसका प्रबल दावेदार माना जा रहा था। चुनाव परिणाम से सबसे ज्यादा निराशा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को हुई है। पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की सात विधानसभा सीटों में से तीन सीट और उस समय की उसकी सहयोगी भासपा को दो सीटों पर सफलता मिली थी।
भासपा ने बीच में ही भाजपा का साथ छोड़कर अलग रास्ते का चयन कर लिया। उसका असर भी पंचायत चुनाव में देखने को मिला है। भाजपा ने सात सीटें जीती हैं, कांग्रेस ने 2 और सुभासपा को एक सीट मिली है। हालांकि भाजपा जिले की सर्वोच्च कुर्सी को पाने के लिए पूरा प्रयास करेगी।
भाजपा के जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह के अनुसार पार्टी के सात अधिकृत प्रत्याशी सफल हुए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पाने के लिए उसे बड़ी संख्या में निर्दल सदस्यों का समर्थन प्राप्त करना होगा। इसलिए ज्यादा संभावना है कि भाजपा किसी दमदार निर्दल प्रत्याशी को ही अपना समर्थन देकर मैदान में उतार दे। बसपा जिलाध्यक्ष अजय कुमार भारती ने बताया कि दस सीटों पर पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों ने सफलता प्राप्त की है। जिले की संसदीय सीट पर भी उसका कब्जा है।