गाजीपुर। दो वर्ष के बाद शुक्रवार को शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की विभिन्न मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज अकीदत एवं उल्लासपूर्ण माहौल में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदा की गयी। नमाज के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरे जिले में आला अधिकारी अपनी पैनी निगाह रखे हुए थे। विभिन्न मस्जिदों पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। नमाज के बाद हजारों मुसलमानों ने अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर उम्मते इस्लामिया के साथ ही आलमे इन्सानियत की खुशहाली, देश में अमन-चैन एवं मुल्क की हिफाजत और तरक्की की दुआएं मांगी।
कोरोना संकट के कारण विगत दो वर्षों में मस्जिदों में अलविदा नमाज की रस्म अदायगी भर हुई थी। अधिकांश लोगों ने घरों में ही परिजनों के साथ अलविदा नमाज अदा की थी। कोरोना संक्रमण दर घटने के साथ ही मिली छूट के बाद इस वर्ष जिले भर की विभिन्न मस्जिदों में अपनी पूरी क्षमता के साथ अलविदा की नमाज पुरसुकून माहौल में अदा की गई। कानों में अजान की सदा आने के साथ ही नमाजियों के कदम मस्जिदों की तरफ निकल पड़े। विभिन्न मस्जिदों के इमाम ने पहले अपनी तकरीर के दौरान रोजा, तरावीह, तिलावते-कुर्आनपाक, एतकाफ, फितरा, जकात की महत्ता पर रोशनी डालते हुए अन्य मामलों पर कुर्आन और हदीस की रोशनी में अपने विचार रखे। इसके बाद इमाम ने खुत्बा पढ़ा। तकबीर के साथ ही अलविदा की नमाज अदा की गई। बारगाहे इलाही में दोनों हाथ उठाकर रमजान के रोजों के साथ ही दिगर इबादतों के कुबूलियत की दुआ के साथ ही मुल्क में अमन-चैन, खैर-ओ-बरकत एवं मुल्क की हिफाजत और तरक्की की दुआ की गई। इससे पूर्व ईद की नमाज के लिए समय निर्धारित किया गया। बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार स्थानीय कस्बा स्थित जामा मस्जिद, शाही मस्जिद, गौसिया मस्जिद आदि के साथ ही मलिकनगांव, पलिवार, रायपुर, देईपुर, झोटना, राजापुर, वृंदावन, मिर्जापुर आदि गांवों की मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज संपन्न हुई। विभिन्न मस्जिदों में नमाज से पूर्व दीनी फजाएल बयान किए गए। इमाम ने विशेष रूप से ईद की नमाज, रोजा, फितरा, जकात आदि को अपनी तकरीर का मौजू बनाते हुए नमाजियों का मार्गदर्शन किया। जामा मस्जिद बहरियाबाद के इमाम हाफिज अब्दुल खालिक ने कहा कि ईद की नमाज से पूर्व आप सदक-ए-फित्र जरूरतमंदों तक पहुंचा दें। जकात साल पूरा होते-होते अदा कर दें। इसके बाद मिम्बर से खुतबा पढ़ा। इसके बाद नमाज अदा की गई। बाद नमाज नमाजियों ने अपने हाथ दुआ के लिए उठाए। खैर-ओ-बरकत, मुल्क में अमनो-अमान के साथ ही मुल्क की तरक्की एवं तहफ्फुज (सुरक्षा) के लिए दुआएं मांगी गई। सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्थानीय पुलिस विभिन्न मस्जिदों पर मौजूद रही।