कासिमाबाद। कासिमाबाद तहसील के एक हाकिम पर सुविधा शुल्क का नशा ऐसा चढ़ा है कि आम आदमी की बात कौन कहे, सत्तापक्ष से जुड़े नेताओें से भी वह मुंह खोलने में पीछे नहीं रहते हैं। वह सोमवार की शाम को सत्ता पक्ष के एक बड़े नेता से भी सुविधा शुल्क की मांग कर बैठे। हालत ऐसे पैदा हुए कि हाकिम तथा सत्तापक्ष से जुड़े लोगों में भिड़ंत की नौबत आ गई । स्थिति खराब होते देख हाकीम को पुलिस बुलाना पड़ा। वैसे वहां उपस्थित अधिवक्ताओं के साथ अन्य लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को किसी तरह शांत कराया। लेकिन यह मंगलवार को भी पूरे तहसील सहित क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कासिमाबाद तहसील इस समय भ्रष्टाचार को लेकर काफी चर्चा में है। तहसील के कासिमाबाद क्षेत्र के राजस्व निरीक्षक राजेंद्र गुप्ता को एंटी करप्शन टीम द्वारा रंगे हाथ गिरफ्तार करने के बाद लगा था कि तहसील से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। लेकिन तीन-चार दिन तक सन्नाटे के बाद एक बार फिर भ्रष्टाचार चरम सीमा पर दिखाई दे रहा है। जहूराबाद क्षेत्र से विधायक रहे एवं सत्तापक्ष से जुड़े एक बड़े नेता की चार फाइलें इस समय तहसील में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। बताया जाता है कि पिछले एक माह से इन फाइलों को निस्तारित कराने के लिए हाकिम के तरफ से स्थलीय निरीक्षण भी कर लिया गया है। जब निस्तारण में देरी हुआ तो पता चला कि इसमें हाकिम को फाइलों को निस्तारित करने में मोटी रकम चाहिए। उधर नेता जी भी अड़े थे कि फाइल बिना पैसे की ही निस्तारित होगी। इसके लिए कई बार हाकिम से गरमा -गरम बहस भी हो चुकी है। लेकिन सोमवार को जो हुआ वह सभी हदें पार कर गया। हकीम के कार्यालय से चारों फाइलें गुम होने के बाद सामने आने पर नेताजी के परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया और तय कर लिया कि आज किसी भी सूरत में फाइल को निस्तारित कराना ही है । गुम फाइल भी मिल गई और बात बढ़ने के बाद हकीम ने एक फाइल को निस्तारित भी कर दिया । इसके बाद तीन फाइलें हाकिम के यहां अभी भी अटकी पड़ी हैं । बताया जाता है कि हाकिम और नेताजी के परिजनों से बातचीत ऐसी हुई कि हाकिम को पुलिस बुलाना पड़ गया । वैसे वहां पर उपस्थित अधिवक्ताओं एवं कुछ संभ्रांत लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत करा दिया । हाकिम की कार्यप्रणाली और मंगलवार की तू तू मैं मैं पूरे तहसील परिसर सहित क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।