प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा अपने ढर्रे पर ही चल रहा है। गाजीपुर जिले में दर्जनों निजी नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे हैं।
इनकी संख्या यहां 40 से अधिक है। जबकि स्वास्थ्य विभाग में केवल आठ नर्सिंग होम ही पंजीकृत हैं। बिना पंजीकरण संचालित हो रहे तथा मानक को पूरा न करने वाले निजी नर्सिंग होमों पर नकेल कसने में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से विफल है।
इनके चलते अपंजीकृत निजी नर्सिंग होम के चंगुुल में फंसने से मरीजों और उनके परिजनों का जमकर आर्थिक शोषण हो रहा है।
स्वास्थ्य महकमे के नाक के नीचे सब कुछ होने के बाद भी अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं।
इतना ही नहीं विभाग के पास बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होमों की सूची भी उपलब्ध नहीं है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में निजी नर्सिंग होम का लेखा-जोखा रखने वाले बाबू/कर्मचारी और उनके उच्चाधिकारी भी इसकी सूची मौजूद न होने की बात बता, अपना पल्ला झाड़ दे रहे हैं।
विभाग की ओर से बिना लाइसेंस संचालित निजी नर्सिंग होमों पर कार्रवाई न करने से संचालक बेखौफ हो इसे चला रहे हैं। देखा जाए तो जिला मुख्यालय सहित तहसील तथा नगर पालिका/नगर पंचायतों में 40 से अधिक निजी नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं।
जबकि विभाग इनकी संख्या बताने में अनभिज्ञता जता रहा है। देखा जाए तो बिना लाइसेंस संचालित हो रहे निजी नर्सिंग होमों पर पिछले एक साल के अंदर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा अपने ढर्रे पर ही चल रहा है। विभाग के अपने ढर्रे पर चलने के चलते मरीजों का आर्थिक शोषण होने के साथ ही बेहतर चिकित्सकीय सुविधा न मिलने से उन्हें काल का ग्रास भी बनना पड़ता है। बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे इन निजी नर्सिंग होमों के चंगुल में फंसने से मरीजों और उनके परिजनों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
बावजूद स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से निष्क्रिय बना हुआ है। इस संबंध में सीएमओ जेएम त्रिपाठी ने बताया कि 30 अप्रैल तक निजी नर्सिंग होमों को लाइसेंस नवीनीकरण के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे निजी नर्सिंग होमों के खिलाफ अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।