सरकार की तमाम कवायदों के बावजूद जिले में मनरेगा योजना का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। बेराजगारों को गांव में ही 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने की यह योजना कर्मचारियों और अधिकारियों की उदासीनता से फ्लाप होती जा रही है। रेवतीपुर ब्लाक में वित्तीय वर्ष 2015-16 में इस योजना के तहत मात्र 14 जॉब कार्ड धारकों को ही सौ दिन का रोजगार मिल सका जबकि रोजगार पाने के लिए 3911 लोगों ने आवेदन किया था।
ग्राम पंचायत चुनाव से पहले ब्लाक के 40 ग्राम पंचायतों में परिवारों की संख्या 17128 थी। ब्लाक में छह नए ग्राम पंचायतों का गठन होने से 46 ग्राम पंचायतों में 25 हजार 941 परिवार थे। पिछले वित्तीय वर्ष में पूरे ब्लाक में 26801 लोगों को मनरेगा के तहत जॉब कार्ड जारी किया गया था। इसके तहत रोजगार पाने के लिए 3911 जॉबकार्ड धारकों ने आवेदन किया गया था। इसमें मात्र 14 परिवारों के 14 जॉबकार्ड धारकों को ही 100 दिन का रोजगार मिल सका।
बता दें कि मनरेगा योजना के संचालित होने के पूरे 10 वर्ष हो गए हैं। इसके बावजूद भी इस योजना का लाभ ग्रामीण क्षेत्र के लोगों तक पूर्ण रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। कि सरकार ने दो वर्ष पूर्व मनरेगा के तहत बेरोजगारों को 110 दिन के बजाए 150 दिन रोजगार देने का प्रावधान कर दिया है।