ठोकर और बोल्डर पीचिंग बनाने के लिए गंगा कटान संघर्ष समिति का पुरैना पंप कैनाल पर धरना मंगलवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों के धरने का असर यह रहा कि सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कटान क्षेत्र
की पैमाइश कर ठोकर और बोल्डर पीचिंग का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने का आश्वासन दिया।
पुरैना पंप कैनाल पर धरने के पांचवें दिन विभिन्न दलों के नेताओं ने भी शिरकत की। इस दौरान सरकारी बैंक के पूर्व
अध्यक्ष व प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण सिंह ने कहा कि शासन की उपेक्षा के चलते कटान का दायरा बढ़ता जा रहा है। उन्होंने सपा और भाजपा पर जनता के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस
जिले में चार मंत्री हों उस जिले की महिलाएं बाढ़ से बचाव के लिए पांच दिनों से धरना दे रही हैं। इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी। जनता की समस्याओं को दूर न कर सकने वाले लोगों को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। अन्य
वक्ताओं ने कहा कि दो दशक से करंडा क्षेत्र कटान की चपेट में है। कई बार बाढ़ और कटान की त्रासदी झेलने के बाद लोगों ने कई बार बाढ़ से बचाव का स्थायी इंतजाम करने की मांग उठाई लेकिन जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया।
धरने के दौरान राज्य सभा सदस्य अरविंद सिंह के प्रतिनिधि समीर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों से सांसद की बात कराई। इस दौरान सांसद ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भिजवाने की बात कहीं। धन स्वीकृत
कराकर काम शुरू कराया जाएगा। इस मौके पर रामविलास यादव, राजेश सिंह मास्टर, गुड्डू प्रधान, उपेंद्र सिंह, अवतार यादव, राजकुमार यादव, अयूब खां, एकराम खां, मनोज यादव, वकील खां, कंचन यादव, रामनिवास यादव, मेराज खां,
शशिकांत राम, कुसुम देवी, किशोरी देवी, आशा देवी, राजकुमारी, बुधिया, नीलिमा देवी, मंगरी, कंचनलता, फूलवासी, खुर्शीदा बेगम, शबनम, अलिमुल्लाह, पारस पासवान, रामनगीना पासवन मौजूद रहे। अध्यक्षता रामविलास यादव ने की। उधर,
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दिनेश सिंह, जेई आरबी राम, अरविंद राय मौके पर पहुंचे और कटान क्षेत्र की पैमाइश की। इस दौरान तीन किलोमीटर तक अधिक कटान पाई गई।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष इम्तियाज खां के नेतृत्व में बयेपुर, कसेरा में मंगलवार को कटान का जायजा लिया। वहां धरना दे रहे पुरैना, बयेपुर, सोकनी, बड़हरिया, रफीपुर के लोगों से बात की।
गांव के लोगों ने बताया कि प्रशासन की अनदेखी के चलते कसेरा और शेरपुर गांव के कई लोगों की जमीन गंगा में समा चुकी है। कई लोगों का पलायन हो गया। कुछ लोगों ने पांच सौ मीटर की दूरी पर मकान बनवा लिया था जो अब गंगा से
मात्र सौ मीटर की दूरी पर है। कहा कि अगर कटान क्षेत्र को नहीं रोका गया तो दोनों गांवों का अस्तित्व भविष्य में खत्म हो जाएगा। प्रतिनिधि मंडल में रंगनाथ दुबे, शशिरंजन राय, चंद्रमा बिंद, मनोज राम, पतिराम राम, रमेशचंद्र पाटिल,
एकलाख अंसारी, नरायन देव पांडेय मौजूद रहे। मानवाधिकार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कटान से बचाव का स्थायी उपाय करने की मांग की है।