बात पांच वर्ष पहले की है। एक किसान का बेटा मुंबई घूमने गया। चकाचौध की बीच उसकी नजर शिरडी स्थित एक पाली हाऊस पर पड़ी। जिज्ञासा वश वह पाली हाउस में गया और जानकारी हासिल करने लगा। इसके बाद घर आया तो अपनी परंपरिक खेती बंद कर आधुनिक खेती शुरू की। मेहनत का परिणाम रहा कि उनके खेत से निकले वाले उत्पाद से उनकी पहचान विदेश में होने लगी। लंदन और जर्मनी तक उनके खेती की सब्जी जाने लगी। यही नहीं इस बार केसर, रंग बिरंगे शिमला मिर्च तक की खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। यह सब कर रहे हैं प्रगतिशील किसान पंकज राय, जो प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
पंकज काशी विद्यापीठ से 2006 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के बाद नौकरी की तलाश में निकले, लेकिन मन मुताबिक नौकरी न मिलने पर पुश्तैनी जमीन में पारंपरिक खेती करने लगे। इसी बीच वह अपने बडे भाई के पास 2018 में मुंबई घूमने गए। वहां शिरडी के आस पास के किसानों के पॉली हाउस में उन्नत तकनीकी खेती देखी। जानकारी लेकर अपने गांव करीमुद्दीनपुर आए और पुश्तैनी जमीन पर ढाई हजार स्क्वायर फिट में एक पाली हाऊस बनवाया। उनके द्वारा स्ट्राबेरी, केशर के साथ ही शिमला मिर्च लाल, पिली गोभी , ब्रोकली, लाल भिण्डी की भी खेती करके अपनी पहचान बना चुके हैं। पूरी खेती आर्गेनिक है।
उन्हें दिसम्बर 2022, मई 2023 को मुख्यमंत्री दो बार सम्मानित कर चुके हैं। पंकज इस समय 12 एकड खेत में सब्जियों की खेती किए हैं। वह बताते हैं कि खेती को सहकारिता की तरह जोड़ दिया है। जरूरतमंद लोगों को अपने मुनाफा में से 20 प्रतिशत के लाभ पर रोजगार भी दे रहे हैं। इस बार वह कश्मीरी केसर की खेती बड़े पैमाने पर करेंगे। साथ ही हरी, पीली और लाल शिमला के लिए बीज की नर्सरी भी डाल दिए हैं।
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लॉकडाउन में सऊदी अरब और लंदन भेजी थी सब्जी
पहली बार पंकज राय ने उन्नतशील किस्म के खीरे की खेती की। मेहनत और खर्चा तो ज्यादा हुआ, लेकिन पहले ही वर्ष ही कमाई में तीन गुना अंतर आ गया। वह बताते हैं कि लाभ होने के बाद से दो एकड़ जमीन पर सब्जियों में लौकी, नेनुआ, करैला सब्जी उगाना शुरू किया। परिणाम अच्छे आने पर 2020 के लॉकडाउन के समय जब सब्जियां आम लोगों को नहीं मिल रही थी उस समय खीरा और लौकी को एपीडा (कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के माध्यम से सऊदी अरब और लंदन भेजा।