सुहवल के बैक आफ इंडिया में पैसा जमा करने के लिए लगी लाइन।
नोट बंदी के 15वें दिन भी प्रतिबंधित 500 और 1000 के नोट को बदलने और जमा करने को लेकर नागरिकों को दुश्वारियां झेलनी पड़ीं। शहर में स्थित बैंकों में तो ग्राहकों को राहत रही, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश बैंकों में प्रतिबंधित नोट बदलने, पैसा उतारने और जमा करने को लेकर लोगों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ा। कई बैंकों में बीच में ही पैसा समाप्त होने से ग्राहकों को बैंक की व्यवस्था को कोसते हुए मायूस होकर घर लौटना पड़ा।
पीएम नरेंद्र नरेंद्र मोदी की तरफ से 8 नवंबर को पुरानेे 500 और 1000 के नोटों को प्रतिबंधित करने की घोषणा के बाद से लोगों में अफरातफरी की स्थिति मच गई थी। खासकर उन लोगों का सुख-चैन छीन गया था, जिन लोगों के पास यह नोट अधिक मात्रा में रखे थे। ऐसे लोग इस जुगत में भिड़ गए कि इन नोटों को कैसै भुनाएं। सूत्रों की मानें तो ऐसे अधिकांश लोगों ने इन नोटों को बचाने के लिए अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के खातों के सहारा लिया।
जमा करने की अपेक्षा सबसे ज्यादा प्रतिबंधित नोटों को बदलने को लेकर परेशान थे। कई लोग पैसा देकर देकर अपने परिचितों को नोट बदलने के लिए बैंकों में लाइन में लगा रहे थे, लेकिन जिन लोगों के पास बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित नोट थी, उनकी परेशानी शुक्रवार को नोट बदलना बंद होने से बढ़ गई है। नोट बदलने पर प्रतिबंध का ही असर रहा कि बैंकों में ग्राहकों की भीड़ काफी कम दिखाई दी।
नोट बदलने पर प्रतिबंध लगने के बाद खासकर उन लोगों के माथे पर बल पड़ गया है, जिन लोगों ने बड़ी मात्रा में इन नोटों को रखा है। उनके सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि अगर वे बड़ी मात्रा में पैसा जमा करते है तो उसका विवरण कैसे देंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश बैंकों में ऐसे हुआ कि कई में बीच में ही पैसा समाप्त हो गया, जिससे घंटों लाइन में लगे लोगों को निराशा हुई। वे बिन पैसा के ही बैंक की व्यवस्था को कोसते हुए घर को लौटने के लिए विवश हुए। ऐसे लोगों में इस बात की चर्चा होती रही कि पता नहीं कब तक अपने ही पैसे के लिए परेशान होना पड़ेगा।