क्षेत्र में कटान का कहर थम नहीं रहा है। पिछले कई दिनों से चल रहा यह कहर शुक्रवार को भी जारी रहा। इस बार कटान की जद में रफीपुर गांव रहा। सुबह प्रारंभ हुए कटान में करीब घंटे भर के अंदर
किसानों की लगभग डेढ़ बीघा कृषि भूमि गंगा में समाहित हो गई। कटान रोकने की व्यवस्था किसी स्तर से न होने से पीड़ितों में रोष है।
जिले के मुहम्मदाबाद, जमानिया एवं करंडा विकासखंड क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से कटान का कहर बना हुआ है। करंडा ब्लाक क्षेत्र के पुरैना, सोकनी, रफीपुर एवं बड़हरिया में कटान का सिलसिला लगातार जारी है। कटान का कहर कभी तेज तो कभी धीमा बना हुआ है। आज सुबह कटान प्रारंभ होते ही करीब घंटे भर में दर्जन भर किसानों की लगभग डेढ़ बीघा कृषि भूमि गंगा में समा गई।
शुक्रवार को हुए कटान में दीनापुर के किसान नर्वदेश्वर यादव, रामअवतार सिंह, कृष्णा सिंह, राधेश्याम सिंह, रामदेव सिंह, धनंजय सिंह, रामा सिंह, गोपाल सिंह, उमाशंकर सिंह, नरेन्द्र यादव, नौदर के रामपूजन सिंह, शिवपूजन सिंह, दिनेश सिंह, श्री सिंह, प्रवोध सिंह, देवमुनी सिंह, बड़हरिया के बालेश्वर यादव, श्रीनाथ यादव, प्रभु यादव, बलदेव यादव, बसई यादव, गोरख यादव, शिवदान, राजदेव, रामदेव, इन्द्रदेव यादव एवं देवमुनी सिंह की लगभग डेढ़ बीघा कृषि भूमि गंगा में विलीन हो गई। गंगा की कटान में रफीपुर के लगभग 150 बीघा के कुल रकबा में से मात्र 25 बीघा भूमि बची है,
शेष भूमि गंगा में विलीन हो गई है। इस वर्ष सबसे अधिक नुकसान बड़सरा के हरिद्वार एवं लक्ष्मण यादव को हुआ जिनकी दो बीघा भूमि कटान में गंगा में समा चुकी है। इस वर्ष की कटान ने अब तक बड़हरिया के तीन किसानों को भूमिहीन बना दिया। सुदामा यादव की पांच बीघा में पिछले वर्ष तक की कटान से आठ बिस्वा भूमि बची थी लेकिन गुरुवार तक हुए कटान ने इनको भूमिहीन बना दिया।
यही हाल देवनारायन यादव एवं तेजनारायन यादव का है। ये दोनों भाई चार-चार बीघा भूमि के मालिक थे लेकिन आज ये भी भूमिहीन हो गए। प्रकृति के अचानक कहर से इन परिवारों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। रफीपुर मौजे में हो रही कटान में पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक नुकसान नौदर के किसान दिनेश सिंह, जनार्दन सिंह, शिवपूजन सिंह, रामपूजन सिंह, कुबेर सिंह और रामकुमार सिंह को हुआ है। आज की कटान में भी सबसे अधिक क्षति इन्हीं किसानों को हुई है।