बरसात जहां लोगों के लिए गर्मी से राहत का संदेश ले कर आई वहीं इससे कई इलाकों में लोग दुश्वारियां भी झेलने को विवश हो गए हैं। गांव के वार्ड संख्या 12-13 एवं 14 में जाने वाला मुख्य मार्ग स्थित घरों से पानी की निकासी का इंतजाम नहीं होने से दो वर्ष से झील बना हुआ है।
बरसात ने इसमें और संकट गहरा दिया है। इससे एक तरफ जहां आवागमन करने वालों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। इसकी वजह यह है कि लोगों के घरों के पानी की निकासी का इंतजाम नहीं है। घरों का पानी निकल कर सड़क पर जमा हो गया है।
परेशान लोगों की तरफ से बार-बार ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं कराया जा रहा है। इससे लोगों में निराशा के साथ ही रोष गहराता जा रहा है।
गांव के वार्ड संख्या 12-13 एवं 14 जाने के लिए मुख्य मार्ग का निर्माण एक दशक पहले कराया गया था। मार्ग के दोनों तरफ नाली का निर्माण नहीं कराया गया। इससे लोगों के घरों का पानी सड़क पर जमा रह रहा है। ताड़ीघाट-बारा मार्ग का निर्माण कराए जाने से नाला बंद हो गया है। इससे गांव के नाला का पानी भी मुख्य मार्ग पर लगा हुआ है।
लोग गंदे पानी के बीच से आने-जाने को विवश हैं। दर्जनों लोगों का घर पानी से घिरा हुआ है। इससे उनका घरों से निकलना दुश्वार हो गया है। मुन्नी सिंह ने कहा कि जल-जमाव की वजह से चैन से रहना दुश्वार हो गया है। पानी के बीच से गुजरने में इस बात का भय बना रहता है कि कहीं अंदर मौजूद कोई विषैला जंतु काट न ले।
जनप्रतिनिधि इस समस्या को लेकर पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं। दिलराम यादव ने कहा कि इस गंभीर समस्या से कई बार ग्राम प्रधान के साथ ही जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, लेकिन उनकी तरफ से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बुधिया देवी ने कहा कि जल-जमाव की समस्या हम लोगों के लिए जी का जंजाल बनी हुई है।
घर से निकलने में एक बार सोचना पड़ रहा है। समाजसेवी मदन सिंह ने कहा कि पानी से दुर्गंध आने से लोगों को संक्रामक बीमारियों का भय सता रहा है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए न तो जनप्रतिनिधि गंभीर दिखाई दे रहे हैं और ही ग्राम प्रधान।