पारा 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं आ रहा है। इसके कारण लोगों को भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से राहत नहीं मिल पा रही है। अब तो दिन के साथ रातें भी गर्म होने लगी है। इसके कारण बिस्तर पर लोग घंटों तक करवटें बदल रहे हैं। लोगों का उपरी मंजिल के कमरें रात में दो-तीन घंटे बाद सामान्य हो रहे हैं, वह भी पंख और कूलर चलाने के बाद।
रविवार को जनपद का अधिकतम तापमान 40.1 और न्यूनतम 23.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तीन दिन पहले जिले का अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। तीन दिनों में वैसे तो तापमान में लगभग दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई है। इसके बावजूद लोगों को दिन में तीखी धूप से राहत नहीं मिल पा रही है।
तपन देर शाम तक बरकरार रह रहा है। आसमान से बरसते अंगारे के कारण लोगों को दिन में आवागमन करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग गमछे और छतरी का सहारा लेकर किसी तरह से अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच रहे हैं। धूप से सबसे अधिक दिक्कत बुजुर्गों और महिलाओं को हो रही है।
सड़कों पर लोग उपर से नीचे तक पूरी तरह से ढंके हुए नजर आ रहे हैं। इस संबंध में पीजी कॉलेज कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक कपिलदेव शर्मा ने बताया कि अधिकतम 40.1 और न्यूनतम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज और तल्ख होगा।
मुंह में छाले, गले में दर्द की बढ़ी समस्या
बारा सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी में बुखार के साथ मुंह में छाले, गले में दर्द जैसी परेशानी के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। बच्चों पर असर अधिक है, खानपान भी मुश्किल हो रहा है। मौसम में पिछले 10 दिन से तेजी से बदलाव दिख रहा है। सीएचसी भदौरा और पीएचसी बारा, गहमर, देवल की ओपीडी में मुंह में छाले निकलने और गले में दर्द होने की समस्या से परेशान लोग पहुंच रहे हैं। कुछ लोग होंठ सूखने और दर्द होने से परेशान हैं। सरकारी अस्पतालों में करीब 35 से 40 मरीज ऐसे आ रहे हैं, जबकि दस दिन पहले तक यह संख्या 15 से 20 तक रहती थी। रविवार को सीएचसी और पीएचसी में बुखार, जुकाम, खांसी, पेट दर्द, दस्त, डिहाईड्रेशन के दर्जनों मरीज पहुंचे। चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी भदौरा डॉ. धनंजय आनंद का कहना है कि मौसम में बदलाव से वायरल फीवर से लोग ग्रसित हो जाते हैं। इसके अलावा बुखार और दर्द से राहत के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के प्रायः लोग दवा ले लेते हैं। दवा के दुष्प्रभाव से कभी- कभी छाले निकलते हैं।
पशुओं को दें ताजा पानी
गर्मी और प्रचंड धूप से केवल इंसान ही नहीं पशु भी प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में उनकी भी देखभाल जरूरी है। पशु पालन विभाग के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एके शाही ने बताया कि पशुओं को अच्छी गुणवत्ता का ताजा पानी पिलाएं। यह उन्हें हाइड्रेटेड रखेगा और गर्मी से बचाएगा। साथ ही पशुओं के लिए ठंडी छायावाली जगहें या शेड बनाएं, जिससे वे गर्मी से बच सकें।
वातावरणीय संबंधित उपायों को अपनाएं, जैसे कि पंखे, कूलर, इत्यादि। पशुओं को धूप से बचाने के लिए शेड या छाया में रखें। पशुओं को गर्मी के मौसम में ताजा पानी, हरा चारा एवं संकेंद्रित पशु आहार दें, जो उनके शरीर को ठंडा रखेंगे। पशुओं को गर्मियों में रात को बंद कमरे में न रखें। पशु गृह के खिड़कियों और दरवाजों पर टाट के पर्दे लगाए और उसे गीला रखें।