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कोई नहीं सुन रहा है किसानों की पुकार

Fri, 24 Apr 2015 11:43 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, गाजीपुर
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प्रदेश में बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से बर्बाद फसल देखकर सदमे से किसानों की मौत एवं आत्महत्या की घटनाएं लगातार जारी हैं। बावजूद इसके राजनीतिक पार्टियां किसानों की चीख पुकार सुनने को तैयार नहीं है। अपना हित साधने के लिए दलों की ओर से घड़ियाली आंसू बहाए जा रहे हैं जबकि किसानों की मौत को रोकने के लिए कर्ज माफी की घोषणा पहली शर्त है।
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 यह बातें अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश महासचिव ईश्वरी प्रसाद कुशवाहा ने सरजू पांडेय पार्क में दो दिवसीय भूख हड़ताल शुरू करते हुए शुक्रवार को कही।
उन्होंने कहा कि अभी तक किसानों की जो मौतें हुई है, उसमें ज्यादातर किसान पेशगी-बंटाईदार किसान हैं, जो इस आपदा में दोहरी मार झेल रहे हैं।

पहले ही वे 10-15 हजार रुपये प्रति बीघा खेत का दे दिए और अब बरसात एवं ओला से फसल भी बर्बाद हो गई, लेकिन मुआवजे के  शोरगुल में पेशगी-बंटाईदार किसान गायब है। जबकि 50 प्रतिशत से ज्यादा खेती पेशगी एवं बंटाई पर हो रही है। उन्होंने पेशगी-बंटाईदार किसानों के लिए कानून बनाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा कानून से किसानों के हितों की सुरक्षा एवं उत्पादन भी बढ़ेगी।
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दिल्ली जंतर-मंतर पर किसान की आत्महत्या पर कहा कि यह दर्दनाक घटना देश एवं प्रदेश की सरकारों के मुंह पर करारा तमाचा है। कारपोरेट परस्त में सरकारें उद्योगपतियों को बजट में अरबों की छूट दे रही है, खेती में सब्सिडी घटाकर लागत बढ़ा रही है और किसान को बर्बाद कर रही हैै। किसान एवं राष्ट्रविरोधी भू-अधिग्रहण अध्यादेश को वापस लेने एवं भूमि संरक्षण कानून बनाने की मांग की। भूख हड़ताल में प्रमोद कुशवाहा, योगेंद्र प्रताप भारती, टेगरी बिंदज, जयराम बिंद, अमरनाथ, मिलन राव, अजीत बनवासी, छांगुर आदि मौजूद थे।
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