गाजीपुर। जिले की प्रमुख सब्जी मंडी मुस्तफाबाद में दो दशक पहले स्थापित हुई, लेकिन आज तक यहां सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गईं। शौचालय व प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। रास्ते पर खड़ंजा बिछाना तो दूर प्यास बुझाने के लिए किसानों, व्यापारियों एवं दुकानदारों को पानी खरीदना पड़ता है। यहां से सब्जियां मऊ, गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, बक्सर, चौसा, कोचस और मोहनिया तक जाती हैं। यहां थोक व फुटकर की 100 दुकानें हैं। ये मंडी करीब 3000 लोगों की जीविका का साधन भी है। रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील होने से यहां रोज सात लाख की बिक्री प्रभावित हो रही है।
सदर ब्लाक के अलावा मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, जमानिया और भदौरा ब्लाक क्षेत्र के किसान वाहन से सब्जी लेकर अलसुबह ही नई सब्जीमंडी मुस्तफाबाद आ जाते हैं। जहां दूर-दराज से आने वाले व्यापारी किसानों की सब्जी खरीदकर ले जाते हैं। यहां प्रतिदिन 20 से 25 लाख रुपये की बिक्री होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम कोई व्यवस्था नहीं है। नई सब्जीमंडी के अध्यक्ष मुहम्मद मोईनी दीन राईनी ने बताया कि मंडी में पैदल चलना दुश्वार है। साफ-सफाई की व्यवस्था न होने से सब्जी के सड़न से उठ रही दुर्गंध से काफी परेशानी होती है। कोषाध्यक्ष राम करन कुशवाहा ने बताया कि मंडी परिसर में दुकानदारों से 800 रुपये प्रतिमाह और बाहर के दुकानदारों से 1200 रुपये लिए जाते हैं, जबकि सुविधाएं गायब हैं। पूर्व अध्यक्ष अतीक अहमद राईनी शहर में सरकारी मंडी का अभाव है। आपसी सहमति बनाकर इस समस्या का निदान कराना चाहिए। जंगीपुर मंडी समिति के सचिव राजेश यादव ने बताया कि नई बस्ती मुस्तफाबाद प्राइवेट मंडी है। जिन दुकानदारों को जंगीपुर मंडी समिति दुकान लगानी है, वह यहां आ सकते हैं।
यहां सब्जी मंडी स्थापित हुए दो दशक हो गए, लेकिन सुविधाएं ना के बराबर है। बारिश के मौसम में तो चलना भी दुश्वार हो चुका है। मार्ग दलदल में तब्दील है।- अमेरिका कुशवाहा, सब्जी विक्रेता
सब्जी मंडी में आवागमन करने का रास्ता दलदल में तब्दील है। आए दिन सब्जी लदे वाहन पलट जाते हैं। बावजूद मंडी में सुविधा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है।- सुरेश राम, सब्जी विक्रेता
पीने का पानी तक नहीं है। शौचालय तक की सुविधा नहीं है। पूरे जनपद के किसान यहां सब्जी लेकर आते हैं। गैर जनपद व प्रांत के व्यापारी यहां सब्जी की खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।- कौशल राईनी, सब्जी विक्रेता
जिले के सबसे बड़ी सब्जी मंडी है। थोक व फुटकर की सब्जी दुकान है, लेकिन यहां व्यापारियों एवं किसानों की सुविधा के नाम पर व्यवस्था शून्य है।- बिहारी, सब्जी विक्रेता