भगवान न करें, आप डेंगू जैसी बीमारी की चपेट मेें आए। वजह जिले में जांच तो दूर प्लेटलेट्स की सुविधा उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ जागरूकता के सहारे ही ऐसी गंभीर बीमारी से लड़ने और मरीजों को रेफर करना ही स्वास्थ्य महकमा का सहारा है। यहीं नहीं शहर एवं ग्रामीण इलाकों में जलजमाव एवं साफ-साफ की स्थितियां संक्रामक बीमारियों को खुले आम दावत दे रही हैं, बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बुधवार को भी पांच संदिग्धों का सैंपल मलेरिया विभाग की टीम ने जांच के लिए बीएचयू भेजा। वर्तमान समय में 16 मरीज डेंगू से पीड़ित हैं।
मौसम परिवर्तन के साथ डेंगू बीमारी ने पांव पसारना भी शुरू कर दिया है। इधर बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के सीएचसी-पीएचसी एवं जिला अस्पताल में जांच की कोई सुविधा नहीं है। सिर्फ किट के सहारे ही जिला अस्पताल में जांच की जाती है, जिससे डेंगू बुखार का होना पुष्ट नहीं हो पाता है।
ऐसे में संदिग्धों का सैंपल बीएचयू भेजा जाता है, जहां से रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लग जाता है और तब-तक मरीज की हालत गंभीर हो जाती है और उन्हें सरकारी अस्पताल अन्यत्र अस्पतालों के लिए रेफर कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। यहीं नहीं जिला अस्पताल में प्लेट्लेट्स के लिए आई मशीन भी अभी तक संचालित नहीं हो पाई है। ऐसे में मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
इधर साफ-सफाई का अभाव भी नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बना हुआ है। नगर के रौजा स्थित श्रीराम कॉलोनी में लंबे समय से सड़क पर गंदा पानी तो लगा ही है, वहीं नालियों में जमाव की स्थिति है। यहीं नहीं इधर-उधर कूड़ा पसरा हुआ है। जबकि ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी खराब है। इस संबंध में मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि संदिग्धों का सैंपल बीएचयू भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही डेंगू की पुष्टि होती है।
प्लेटलेट कम होना डेंगू के लक्षण नहीं: सीएमओ
गाजीपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. हरगोविंद सिंह ने बताया कि बुखार से भयभीत होने की बजाय घरों एवं आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना अति आवश्यक है। प्लेटलेट का कम होना डेंगू का लक्षण नहीं है। अन्य बीमारियों में भी प्लेटलेट्स की संख्या में कमी होती है। डेंगू के इलाज के लिए कोई विशेष दवा नहीं है। बुखार कम करने के लिए पेरासिटामॉल की जरूरत होती है। आईब्रुफेन एवं डिस्प्रिन आदि का सेवन न करें। बारिश के दौरान एवं उसके बाद आसपास जलजमाव के कारण मच्छर जनित बीमारियों के संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही साथ बारिश के बाद अचानक से तेज धूप निकलने के कारण वायरल बुखार का संक्रमण भी होता है।
घरों की छतों पर एकत्र न होने दें पानी
गाजीपुर। घरों के आसपास, घरों की छतों पर तथा घरों के अंदर कहीं भी पानी एकत्र न होने दें। अनावश्यक वस्तुओं जैसे पुराने टायर, प्लास्टिक अथवा मिट्टी के पुराने बर्तन, बोतल, ग्लास, नारियल के खोल आदि को तत्काल हटा दें। कूलर के पानी को निकाल कर अच्छे से साफ करके सुखा दें। शरीर को पूरी तरीके से ढंक कर रखें और सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। हमेशा ताजे भोजन का सेवन करें। पीने के लिए शुद्ध पेयजल का प्रयोग करें। सड़े गले एवं पहले से कटे फल सब्जी अथवा बासी मछली का प्रयोग बिल्कुल न करें।