एक ओर रेलवे अधिकारी रेलवे व्यवस्था को हाईटेक बनाने का दावा कर रहे हैं तो दूसरी तरफ धरातल की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। जनपद के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का अभाव है। स्थिति यह है कि रेलवे स्टेशनों पर शौचालय, पेयजल, बेंच, पंखें जैसी बुनियादी सुविधाए तक नहीं है। ऐसे में यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का हाल क्या है।
जिला मुख्यालय पर स्थित सिटी रेलवे स्टेशन जनपद का महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। प्रतिदिन औसतन 5 हजार यात्री आवागमन करते हैं। इसके बावजूद यात्री सुविधाओं को लेकर विभाग व अधिकारी उदासीन हैं। प्लेटफार्म नंबर एक पर जहां निर्माण कार्यों का मलबे का ढेर लगा हुआ है तो वहीं बैठने के लिए लगाई गईं बेंचे तितर-बितर हैं।
10 दिन पूर्व टिकट काउंटर के पास चार पंखे लगाए गए थे, लेकिन मौके पर एक बंद मिला। कर्मियों ने बताया कि कुछ तकनीकी खामी आ गई है।
जखनिया स्टेशन पर नहीं है सुलभ शौचालय
केस नंबर एक - जखनिया स्थानीय रेलवे स्टेशन पर सुलभ शौचालय नहीं होने से महिला यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्टेशन पर प्रतिदिन एक हजार यात्री आवागमन करते हैं। प्लेटफार्म नंबर एक पर 20 वर्ष पहले निर्मित एक शौचालय है, लेकिन वर्तमान में वह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। साथ ही गंदगी पसरे होने के कारण उधर से लोग गुजरना भी पसंद नहीं करते हैं।
सारनाथ एक्सप्रेस : पहले होता था ठहराव, अब नहीं
केस नंबर दो - नंदगज रेलवे स्टेशन से क्षेत्र के लगभग 50 गांवों के यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। इसके बावजूद रेलवे स्टेशन पर पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। कोरोना काल से पहले नंदगज रेलवे स्टेशन पर एक एक्सप्रेस ट्रेन सारनाथ एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव होता था, लेकिन आज तक उसका ठहराव सुनिश्चित नहीं किया गया।
करीब 300 यात्री प्रतिदिन स्टेशन से सफर करते हैं। दोनों प्लेटफार्म पर बने शौचालय पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, जिसके पास से गुजरने पर बदबू के कारण लोगों का हाल- बेहाल हो जाता है।
सूखी पड़ीं नलों की टोटियां
केस नंबर तीन - औड़िहार प्लेटफार्म नंबर तीन पर पेयजल की सुविधा के लिए नल की चार टोटियां लगाई गई हैं। लेकिन, नल की चारों टोटियों से पानी नहीं आता है। प्यासे यात्री जब नल को देखते हैं, तो उम्मीद जगती है कि अब प्यास बुझ जाएगी, लेकिन टोटियों को दबाने के बाद पानी नहीं आता है। प्लेटफार्म नंबर 4 व 5 पर भी पेयजल की बेहतर व्यवस्था नहीं है। दोनों प्लेटफार्म पर शौचालय तक नहीं है।
यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए रेलवे प्रशासन प्रयासरत है। जहां कमियां हैं, वहां सुधार करने का निर्देश दिया जाएगा। शौचालय व पेयजल की समस्या का वरीयता के आधार पर समाधान होगा। अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल