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Mukhtar Ansari Death: तीन हिंदू मजदूरों ने खोदी 7.6 फीट की कब्र, परिवार से पुराना नाता; बोले- नहीं लेंगे मोल

Sat, 30 Mar 2024 11:46 AM IST
प्रगति चंद अंकुर शुक्ला, गाजीपुर।

सार

माफिया मुख्तार अंसारी की बांदा में गुरुवार की रात में मौत हो गई थी। मौत के बाद शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव गाजीपुर के लिए रवाना हुआ। देर रात तक गाजीपुर में लोग शव के काफिले का इंतजार करते रहे। सुबह से ही शव दफनाने के लिए कब्र खोदी गई।
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Mukhtar Ansari Death - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माफिया मुख्तार अंसारी को सुपुर्दे-ए खाक करने के लिए उसके घर से करीब 400 मीटर दूर पुस्तैनी कब्रिस्तान में कब्र खोदी गई, जो 7.6 फीट लंबी और पांच फीट गहरी और चौड़ी है। यह कब्र उसके मां-बाप की कब्र से पांच फीट नीचे (पैर की तरफ) बनाई गई है, जिन्हें खोदने वाले तीन हिंदू मजदूर बुलाए गए। हालांकि उनका कहना था कि मुख्तार अंसारी के परिवार से जिन लोगों का इंतकाल होता है उनके लिए वे पहले से ही कब्र खोदने के लिए आते हैं।
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इस कब्रिस्तान में अब तक मुख्तार के परिवार से पिता सुबहानल्ला अंसारी और उनकी पत्नी का कब्र अगल-बगल बनाया गया है, जबकि उनके पूर्वजों की कब्र बगल में है। मुख्तार अंसारी की कब्र को उनके कब्र से पांच फीट नीचे सुबह साढ़े सात बजे बनाने का काम शुरू हुआ। यह कार्य उनके भतीजे शोहेब अंसारी की निगरानी में हुई, जिसके लिए तीन हिंदू मजदूर नगीना, संजय और गिरधारी को बुलाया गया। 

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कब्र की खोदाई के समय भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। मुख्तार अंसारी के शरीर के हिसाब से कब्र 7.6 फीट लंबी खोदी गई, जबकि शहर भारी होने के कारण चौड़ाई और गहराई भी पांच फीट रखी गई। कब्र खोदाई का काम दोपहर 12 बजे तक चला। इस दौरान कब्र को देखने के लिए परिवार सहित मुख्तार अंसारी को चाहने और जानने वाले पहुंचते रहे। फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी अपलोड करते रहे, जो खूब वायरल हो रही है।

मुख्तार को मसीहा तो उसके पिता को गुरू मानते हैं कब्रिस्तान के मुजावर अफरोज अंसारी

कब्रिस्तान के अंदर कब्र की खोदाई करवाते हुए। - फोटो : अमर उजाला
मुख्तार अंसारी भले ही पुलिस, सरकार और लोगों की नजर में आईएसआई-191 गैंग सरगना और माफिया हो, लेकिन बहुत से लोगों के लिए मसीहा से कम नहीं था। इनमें मुख्तार अंसारी के पुस्तैनी कब्रिस्तान की देखभाल में लगे मुजावर अफरोज अंसारी भी हैं, जो समीप के स्टेशन के निवासी भी हैं, जो मुख्तार अंसारी को मसीहा से कम नहीं बताते हैं और उनके पिता को अपना गुरू बताते हैं। 

अफरोज अंसारी बताते हैं कि वह कक्षा आठ तक ही पढ़ाई किए हैं। लेकिन, मुख्तार अंसारी के पिता सुबहानल्ला अंसारी के पिता ने उन्हें अरबी और उर्दू पढ़ाया था, जिससे वह उन्हें अपना गुरू बनाते हैं। अफरोज अंसारी नम आंखों के बीच कहते हैं कि 2006 के पहले कालीबाग स्थित कब्रिस्तान में बाउंड्री नहीं थी। लेकिन, 29 दिसंबर 2006 में उनकी मौत हो गई, तब मुजावर अफरोज अंसारी को बुलाया गया था। 

इसके बाद परिवार के लोगों ने उनसे कब्रिस्तान की देखभाल करने की जिम्मेदारी सौंप दिया और बदले में उनकी हर तरह से मदद करने लगे। अफराज अंसारी बताते हैं कि जब मुख्तार अंसारी आगरा की जेल की में बंद था तब उससे मिलने के लिए भी गए थे। उस समय मुख्तार अंसारी ने उनकी पूरी मदद किया था। वह कहते थे मुख्तार अंसारी कोई माफिया नहीं थे, बल्कि गरीबों के लिए मसीहा थे।
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मुख्तार अंसारी की कब्र खोदने वालों ने कहा, नहीं लेंगे मोल

मुख्तार अंसारी की कब्र खोदने वाले मजदूरों की नजर में मुख्तार अंसारी की काफी इज्जत थी। उन्होंने कहा कि अंसारी परिवार उनकी हर तरह से मदद करता है। वे मुख्तार अंसारी के कब्र खोदने का कोई मोल नहीं लेंगे। कब्र खोदने वाले मजदूर नगीना कहते हैं कि वह 50 वर्षों से यह काम कर रहे हैं और मुख्तार अंसारी के परिवार से उनका नाता रहा है, जब उनके परिवार में किसी का इंतकाल होता है तो उन्हें कब्रिस्तान में कब्र खोदने तक के लिए बुलाया जाता है। वह, उसके बदले में कोई मोल नहीं लेंगे। कुछ ऐसा ही दो पीढ़ियों से इस कार्य में लगे संजय भी कहते हैं। इसी तरह गिरधारी भी कहते हैं कि वह इस कार्य से लिए कोई कीमत नहीं लेंगे, मुख्तार अंसारी का परिवार उनकी हर तरह से मदद करता है।
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