विश्वास में लेकर उन्होंने 12 अलग-अलग विड्रॉल फाॅर्म पर हस्ताक्षर कराए और कहां कि कुछ दिन में 20 लाख का किसान विकास पत्र, राष्ट्रीय बचत पत्र और अन्य योजनाओं में निवेश कर के सभी पासबुक दे देंगे लेकिन मृतक क्लेम फॉर्म पोस्ट ऑफिस से अस्वीकृत होने की बात कहकर कुछ दिन का समय लिया।
इसी बीच, नौ जून 2022 को मैसेज आया कि डेढ़ लाख रुपये निकाले गए हैं। इस पर उनसे संपर्क किया तो उसी दिन पंजीकृत मोबाइल नंबर को बदलवा दिए। इससे लेन-देन की जानकारी नहीं हो पाई और वे गुमराह करते रहे। जरूरत पड़ने पर बैंक खाते को चेक किया तो पता चला कि 800 रुपये ही शेष हैं, जिसके बाद पता चला कि अकाउंट से अलग-अलग तिथियों में बैंक से रुपये निकाले गए हैं।
आरोप है कि आरोपी ने श्यामसुंदर और उनकी पत्नी के संयुक्त खाते से भी रुपये निकाले हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी बिना जानकारी के ही तीन फंडिंग खाता भी खोला गया था। उसमें जमा रुपये निकाल लिए गए।
आरोप है कि डाकखाने पर जाने पर पता चला कि उनके हस्ताक्षर अंग्रेजी और हिंदी में किए गए हैं, जो उनके नहीं थे। इसकी उन्होंने तीन फरवरी को डाक अधीक्षक से शिकायत की है। डाक अधीक्षक पीके तिवारी ने बताया कि शिकायत मिली है। कमेटी बनाकर जांच कराई जा रही है, जो तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर कार्रवाई होगी।