मुसीबत: राशन कार्ड बनवाने के लिए भटक रहे लोग
अंगुली का निशान मिलने पर ही मिलेगा राशन
...और कोटेदार कर रहे मनमाना काम
अमर उजाला ब्यूरो
नंदगंज। पूरे प्रदेश में अब राशन के लिए लागू की गई नयी व्यवस्था से लोग परेशान हैं। इसमें राशन के लिए पहले आधार कार्ड, अब अंगुली के निशान वह भी आधार कार्ड के रिकॉर्ड में दर्ज निशान से मेल खाना जरूरी हो गया है। सैदपुर तहसील के विभिन्न गांवों से लगातार शिकायतें आ रही हैं कि लोगों को अंगुली निशान की अनिवार्यता की वजह से भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जनपद मुख्यालय पर जो हालात दिखाई दे रहे हैं, इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण इलाक़ों में कैसी स्थिति होगी ? लोग राशन कार्ड बनावाने के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं।
कई गांवों के राशन दुकानों का जब जायजा लिया गया। ग्राहक तथा कोटेदारों से बात की गई, तो पता चला कि कार्ड है, आधार है, लेकिन आधार लिंक न करने से मुसीबत खड़ी हो गई है। अपात्र की कौन कहे पात्र लोग भी राशन कार्ड बनवाने के लिए परेशान दिखाई दे रहे हैं। राशन लेने के लिए लागू की गई नई व्यवस्था के तहत जिस घर में राशन दिया जा रहा है , वहां किसी एक सदस्य के उंगली का निशान मिलना अनिवार्य है। अगर उंगली के निशान मेल खाते हैं तो राशन मिलेगा वरना खाली थैला लेकर लौटना पड़ेगा। अगर लगातार तीन महीने तक किसी को राशन नहीं मिला, तो उसका राशन कार्ड रद्द हो जाएगा। पहले की व्यवस्था के तहत राशन कार्ड दिखाकर पर्ची कटवाई जाती थी और फिर राशन मिलता था। लेकिन अब लोगों को राशन लेने में मुश्किलों को सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि कई परिवारों में आधे से अधिक लोगों का नाम राशन कार्ड से गायब हो जा रहा है।
इनसेट...
..और नहीं मिल रहे अंगुली के निशान
नंदगंज। इलाके के कई गांवों में ऐसी शिकायत आम हो गई है कि सस्ते गले की दुकान पर राशन लेने पहुंचे कार्ड धारकों को काफी इंतजार के बाद नंबर आने पर अंगुली का निशान न मिलने से वापस जाना पड़ता है। उन्हें इस कारण राशन नहीं मिला, क्योंकि उनकी कोई भी उंगली आधार से मैच नहीं कर रही है। लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार बार-बार नियम बदल रही है। बावजूद भ्रष्ट लोग अपना रास्ता निकाल ले रहे हैँ। परेशानी केवल आम आदमी को हो रही है। लोगों की शिकायत है कि राशन कार्डधारकों को चावल, गेहूं और किरोसिन में कटौती कर कम अनाज दिया जा रहा है।
कोट:
-रामपुर बंतरा निवासी रामाशीष यादव ने कहा कि परिवार में मेरे भाई का राशन कार्ड से नाम गायब कर दिया गया है। बार- बार चक्कर काटने के बाद भी नहीं जोड़ा जा रहा है। राशन कार्ड के लिए नाम जुड़ने के बाद भी उसे तीन माह बाद राशन मिलना शुरू होगा।
-बरहपुर निवासी रशीदा परवीन ने कहा कि राशन कार्ड में यूनिट के हिसाब से राशन मिलना चाहिए, लेकिन कोटेदार उसमें से भी कुछ यूनिट काट कर राशन देता है। अंगुली का निशान लगाने के बाद भी पात्र व्यक्ति को राशन मिलता है। अंगुल का निशान सही नहीं मैच किया तो कार्डधारक को वापस लौटना पड़ता है।
-इलाके इशोपुर निवासी रमेश शर्मा ने कहा कि किसी महीने राशन कार्ड में नाम रहता है, तो किसी महीने नाम काट दिया जाता है। जिससे परेशानी बढ़ जाती है। राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए सहज जन सेवा केंद्र का चक्कर काटना पड़ता है ।
-श्रीगंज निवासी मुमताज का कहना है कि राशन कार्ड में परिवार के सदस्यों का नाम जोड़ने के लिए तहसील से लेकर कोटेदार तक चक्कर लगाना पड़ता है, तब भी नाम नहीं जुड़ पा रहा है। आधार कार्ड तथा अंगुली के निशान के बिना अब राशन मिलना कठिन हो गया है।
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