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Ghazipur News: घर की डेहरी डांक कर पुलिस की चौखट पर पहुंची पति-पत्नी की कलह, 265 दिनों में आए 619 मामले

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गाजीपुर। घर की चारदीवारी में शुरू होने वाला पति-पत्नी का विवाद अब पुलिस के महिला सहायता प्रकोष्ठ और परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंच रहा है। परिवार परामर्श केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, एक जनवरी से 21 सितंबर तक 265 दिनों में ऐसे 619 मामलों की सुनवाई हुई। इनमें 227 मामलों में पति-पत्नी की काउंसिलिंग और मध्यस्थता के बाद आपसी सहमति से विदाई कराई गई। 59 ऐसे मामले रहे, जिनमें पूर्व में विदाई के बाद दोनों पक्षों की कुशलता सामने आने पर पत्रावली बंद कर दी गई। वहीं 112 मामलों में अथक प्रयास के बाद भी मध्यस्थता सफल नहीं हुई तो विधिक सलाह देकर पत्रावली बंद की गई। सिर्फ 19 मामलों में मध्यस्थता विफल होने के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई।
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आंकड़े बताते हैं कि महिला सहायता प्रकोष्ठ में पहुंचने वाले हर विवाद का रास्ता सीधे थाने और मुकदमे तक नहीं जाता। बड़ी संख्या में मामलों में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत, समझाइश और काउंसिलिंग के जरिये रिश्ते बचाने का प्रयास किया जा रहा है। 167 मामलों में दोनों पक्षों के उपस्थित नहीं होने के कारण पत्रावली बंद की गई, जबकि शेष मामलों में मध्यस्थता के लिए अगली तिथि निर्धारित की गई है।
केस-एक
आर्थिक चिंता से टूटने के कगार पर पहुंचा रिश्ता
दुल्लहपुर क्षेत्र के एक गांव में पति-पति का एक मामला बताता है कि कई बार विवाद की जड़ बड़ी नहीं होती, लेकिन बातचीत का अभाव उसे गंभीर बना देता है। यहां पति-पत्नी के बीच आपसी गलतफहमियां बढ़ती गईं। पत्नी की शिकायत थी कि पति की मासिक आय महज 25 हजार रुपये है और वह घर का खर्च या उसकी जरूरतें पूरी नहीं कर पाते। इसी वजह से वह ससुराल जाने को तैयार नहीं थी और उसने रिश्ता आगे नहीं चलाने की बात कही।
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जबकि पति पत्नी को साथ ले जाने के लिए तैयार था। मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा तो काउंसलर्स और पुलिस लाइन की मध्यस्थता टीम ने दोनों पक्षों की काउंसिलिंग शुरू की। इसके बाद पत्नी भी राजी हो गई। दोनों की रजामंदी के बाद परामर्श केंद्र में ही विदाई कराई गई और सुलह की पुष्टि के लिए आगामी चार तारीख को बुलाया गया।
केस-दो
रसोई की तकरार पहुंची थाने तक
दूसरा मामला शहरी क्षेत्र से जुड़ा है। पति-पत्नी के बीच रसोई और छोटी-छोटी घरेलू बातों को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे अविश्वास और तकरार में बदल गया। स्थिति मारपीट और थाने-कोर्ट तक पहुंच गई। पत्नी ने ससुराल लौटने से इन्कार कर दिया, जबकि पति भी अपनी बात पर अड़ा रहा। परिवार परामर्श केंद्र की प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों को तीन बार नोटिस देकर बुलाया गया। शुरुआत में दोनों पक्ष केंद्र आने को तैयार नहीं थे। समझाइश के बाद दोनों आमने-सामने आए। काउंसलर्स ने बातचीत के दौरान उनके बीच के मतभेदों और अहं के टकराव को दूर करने का प्रयास किया। बच्चों और परिवार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई दौर की काउंसिलिंग हुई। इसके बाद दोनों पक्ष पुरानी कड़वाहट भुलाकर साथ रहने के लिए राजी हो गए।
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महिला परिवार परामर्श केंद्र में महिला पुलिस अधिकारी और नामित सदस्यों की ओर से पति-पत्नी और उनके परिजनों की काउंसिलिंग की जाती है। उद्देश्य वैचारिक मतभेदों और पारिवारिक विवादों को बातचीत के जरिये दूर कर परिवार को टूटने से बचाना है। -डॉ.ईरज राजा, पुलिस अधीक्षक
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एक नजर में
619 मामले एक जनवरी से 21 सितंबर तक सुने गए
227 मामलों में मध्यस्थता के बाद विदाई
59 पूर्व में विदाई वाले मामले कुशलता के बाद बंद
112 मामलों में मध्यस्थता विफल, विधिक सलाह के बाद पत्रावली बंद
19 मामलों में मध्यस्थता विफल होने पर अभियोग दर्ज
167 मामलों में दोनों पक्ष उपस्थित नहीं हुए, पत्रावली बंद
शेष मामलों में अगली तारीख तय कर मध्यस्थता जारी
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