मरदह। जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थानीय विकासखंड के सुलेमापुर देवकली गांव स्थित सिद्धपीठ शिवस्थली महाहर धाम भक्तों के आस्था एवं विश्वास का केंद्र है।
शिवस्थली के रूप में इसका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यहां तेरहमुखी शिव एवं शिव-पार्वती की युगल मूर्ति पर जलाभिषेक कर श्रद्धालु पुण्य के भागी बनते हैं।
जिले के उत्तरी भाग पर स्थित इस धाम पर जहां महाशिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। वहीं पूरे सावन माह मंदिर परिसर घंटों की आवाज से गुंजायमान रहता है।
इस धाम की ऐसी मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग का दर्शन करने से मनुष्य के सारे पाप कट जाते हैं। सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद भोलेनाथ पूरी करते हैं। कहा जाता है कि इस धाम का निर्माण राजा दशरथ ने कराया था।
यह महल दशरथ की गढ़ी के नाम से विख्यात है। वेदों एवं पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार श्रवण कुमार की यहीं पर राजा दशरथ के चलाए गए शब्दभेदी बाण से मृत्यु हो गई थी।
धाम के दक्षिण तरफ श्रवणडीह नाम का गांव भी विद्यमान है, जहां पहले से बनाया गया श्रवण कुमार का मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। धाम परिसर में शिव मंदिर के अलावा भगवान हनुमान, भैरवनाथ, संत रविदास, भगवान ब्रम्हा की चार मुखी प्रतिमा, मां दुर्गा, राधा-कृष्ण, राम-लक्ष्मण-जानकी की प्रतिमा सहित कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई हैं।
तेरह मुखी मुख्य शिवलिंग के साथ ही शिव-पार्वती की युगल मूर्ति भी अद्भुत है। मंदिर के सामने उत्तर से दक्षिण तरफ दिशा में एक किलोमीटर तक लंबा सरोवर है, जहां हजारों वर्ष पहले इस स्थान पर मां गंगा का प्रवाह था, जो अब पूरइन झील के रूप में रह गया है।
सावन के प्रत्येक सोमवार को जलाभिषेक के लिए यहां कांवरियों की भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा महाशिवरात्रि के अवसर पर 7 दिनों तक चलने वाले मेले में दर्शनार्थियों की भीड़ होती है।