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Ghazipur News: 700 आरआरसी में से 420 पर लटके ताले, कहीं गेट और कूड़ा नहीं, कहीं फर्श धंसी

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गाजीपुर। पंचायती राज विभाग की ओर से जनपद की 1238 ग्राम पंचायतों में 700 आरआरसी (एकीकृत अपशिष्ट प्रबंध केंद्र) का निर्माण कराया गया है। एक आरआरसी सेंटर के निर्माण पर औसतन 9.50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इस तरह से 700 आरआरसी सेंटर के निर्माण पर 66 करोड़ 50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। शनिवार को की गई पड़ताल में सामने आया कि 60 प्रतिशत यानी 420 आरआरसी सेंटर पर ताले लटक रहे हैं। जबकि कई जगहों पर फर्श धंस गई है। कहीं गेट नहीं लगा है तो कहीं कूड़ा ही नहीं दिखा।
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जनपद की 1238 ग्राम पंचायतों में करीब 39 लाख की आबादी रहती है। इतनी बड़ी आबादी को साफ-सुथरा माहौल देने के लिए पंचायती राज विभाग की ओर से आरआरसी बनाए गए हैं। विभाग की फाइलों में सभी आरआरसी क्रियान्वित हैं। लेकिन, जमीनी सच्चाई इसके इतर है। ज्यादातर आरआरसी बंद होने से इनका लाभ संबंधित ग्राम पंचायतों को नहीं मिल पा रहा है।

एक वर्ष से लटक रहा ताला
बाराचवर विकासखंड के दहेंदू ग्राम पंचायत में वित्तीय वर्ष 2024-25 में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र का निर्माण कराया गया था। निर्माण कार्य हुए एक वर्ष बीत चुके हैं। लेकिन, इसके बाद भी यहां पर ताला लटक रहा है। जब से इसका निर्माण कार्य हुआ है, तब से यह नहीं खुला है।
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तीन वर्ष बाद भी नहीं बदली परिस्थिति
मरदह विकासखंड के गाई ग्राम पंचायत में वित्तीय वर्ष 2022-23 में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र का निर्माण हुआ था। तीन वर्ष बाद भी आरआरसी बंद पड़ा हुआ है। ग्राम पंचायत की स्वच्छता में इसका कहीं कोई योगदान नजर नहीं आ रहा है।

गेट लगाना भूल गए जिम्मेदार
ग्राम पंचायत हरहरी में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र तैयार करने के नाम पर चहारदीवारी खड़ी करने के साथ ही टिनशेड लगा दिया गया। लेकिन, जिम्मेदार इसका गेट लगाना ही भूल गए। दो वर्ष पूर्व निर्मित आरआरसी बगैर इस्तेमाल के ही बदहाल होने लगा है। इसके फर्श से प्लास्टर उखड़ने के कारण नीचे दबीं गिट्टियां साफ नजर आने लगी हैं।

धंसने लगी फर्श, गुणवत्ता पर उठने लगे सवाल
सैदपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत इटहा में वित्तीय वर्ष 2023-24 में एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र का निर्माण कराया गया था। हालांकि यहां पर स्थित आरआरसी पर गेट खुला था। लेकिन, गेट खुलने का यह भी मतलब नहीं था कि अंदर कूड़े का ढेर लगा हो और उसका निस्तारण किया जा रहा हो। अलबत्ता धंसी हुई फर्श जरूर नजर आई। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

विभाग को नहीं मिला ताला, रस्सी का लगाया जुगाड़
जमीन संदल ग्राम पंचायत स्थित एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंध केंद्र बंद नजर आया। लेकिन, मजे की बात यह रही कि इसको बंद करने के लिए ताला नहीं लटकाया गया है, बल्कि इसके गेट को रस्सी व कपड़े के सहारे बंद किया गया है। इसको देखकर ग्रामीण इतना जरूर कहते हैं कि गेट बंद करने के लिए विभाग को ताला भी नहीं मिला।

कूड़े का ढेर नहीं बल्कि बाइक बढ़ा रही शोभा
कासिमाबाद विकासखंड के ग्राम पंचायत जहूराबाद अपशिष्ट प्रबंध केंद्र में कहीं कूड़े का ढेर व निस्तारण की गतिविधियां होती नजर नहीं आईं। अपशिष्ट प्रबंध केंद्र का गेट खुला तो जरूर था, लेकिन उसके अंदर का नजारा हैरान कर देने वाला था। वहां कूड़े के ढेर की जगह पर बाइक व ईंट नजर आई।

यहां-यहां अनुपयोगी मिले आरआरसी सेंटर
-बौरी

-जमीन संदल
-इटहा

-हरहरी
-गाई

-दहेंदू
-रामबन

-कामाख्या
-जहूराबाद

क्या है आरआरसी
आरआरसी में संबंधित ग्राम पंचायत के कूड़ों को इकट्ठा करके लाया जाता है। यहां पर गीले व सूखे कूड़े को अलग-अलग करके निस्तारित किया जाता है। इसका मूल उद्देश्य यह है कि खुले में कूड़े का निस्तारण न किया जाए, क्योंकि इससे वातावरण प्रदूषित होता है।

गांवों में आरआरसी तो बना दिए गए हैं, लेकिन क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। जबकि इनके निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं। - अभिषेक यादव, फत्तेपुर

आरआरसी निर्माण के बाद से बगैर इस्तेमाल के बदहाल हो रहे हैं। जिम्मेदार इनको बिसरा दिए हैं। इनके निर्माण के नाम पर केवल धन का दुरुपयोग हुआ है। - जगरनाथ बिंद, जमीन संदल
विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन आरआरसी का निर्माण हो गया है, उनका संचालन भी हो। यह एक तरह से विभागीय लापरवाही है। -रामनाथ चौहान, रामबन

अगर आरआरसी का संचालन सुनिश्चित कर दिया जाए तो कूड़ों की छंटाई के बाद बिक्री के कारण ग्राम पंचायत की आय भी बढ़ेगी। - केदार यादव, रामबन


जो आरआरसी बंद हैं। उनकी जांच करके उनको संचालित करने का निर्देश दिया जाएगा। जिन आरआरसी सेंटरों में कमियां हैं, उनको भी दुरुस्त कराया जाएगा। - रमेशचंद उपाध्याय, डीपीआरओ
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