फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: झाड़-फूंक के चक्कर में जा रही जान, एंटी वेनम एकमात्र उपाय

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर। बरसात शुरू होते ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। झाड़-फूंक के चक्कर में फंस कर मरीजों की जान चली जाती है। धुंधली दृष्टि, चक्कर और सांस लेने में कठिनाई होती है। खासकर चिंता और भ्रम हार्ट अटैक के मुख्य कारण बनते हैं। बचाव का एकमात्र उपाय स्नेक एंटीवेनम है। बावजूद इसके लोगों में जागरूकता का अभाव बना है।
विज्ञापन

रात के समय घर से निकल रहे हैं या अंधेरे में जा रहे हैं तो सावधान रहने की जरूरत है। बारिश और जलभराव के बाद सांप सिवान और खेत छोड़कर गांव की ओर रुख कर देते हैं। ऐसे में जरा सी चूक खतरे को दावत दे सकती है। बारिश के मौसम में आम दिनों की तुलना में सर्पदंश की घटनाएं पांच से छह तक गुना बढ़ जाती हैं।
आमतौर पर देखा गया है कि सर्पदंश से दो तिहाई मौतें हार्ट अटैक से होती हैं। हालांकि समय पर इलाज शुरू होने से जान बच जाती है। चिकित्सक बताते हैं कि इस मौसम में सावधान रहने की जरूरत है। अगर सांप डंसता है तो झाड़-फूंक के चक्कर में न फंसकर पीड़ित को लेकर तत्काल अस्पताल आएं।
विज्ञापन

सांप बहरे होने के कारण सुनते नहीं हैं। आंखों के सहारे हिलती-डुलती चीज को देखकर और धरती के कंपन के अनुमान पर आक्रमण करते हैं। सांप जब हमलावर दिखें तो भागने के बजाय उनके ऊपर कपड़ा या रूमाल फेंकनी चाहिए, जिससे वह उसमें फंस जाएं।
सर्पदंश पर घबराएं नहीं, आराम से लेट जाएं, कपड़े ढीले कर दें। घड़ी अंगूठी जैसे आभूषण निकाल दें। छोटे बच्चे, वृद्ध और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों में जहर का असर गंभीर हो सकता है। इनके उपचार में देर न करें। घाव के साथ छेड़छाड़ न करें। दौड़ने भागने से जहर तेजी से शरीर में फैलता है।
सीएमएस डाॅ. राजेश सिंह ने बताया कि सर्पदंश से न्यूरोटॉक्सिन शरीर में फैलता है, जो नसों को प्रभावित करता है। वहीं कार्डियो टॉक्सिन के चलते हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें