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बाल कलाकारों ने किया जीवंत मंचन

Mon, 01 Feb 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गाजीपुर
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डॉ. गजाधर शर्मा गंगेश की एकांकी समकालीन राष्ट्रीय, सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों को गहराई से उद्घाटित करने वाली है। उनकी पाप-पंक समेत अन्य एकांकी यथार्थ बोध से ओतप्रोत हैं। ये बातें राज्य हिंदी संस्थान के पूर्व अध्यक्ष ख्यातिलब्ध साहित्यकार डॉ. कन्हैया सिंह ने नंदगंज स्थित शहीद स्मारक इंटर कालेज के सभागार में रविवार
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को आयोजित समारोह में एकांकी संग्रह पाप-पंक का लोकार्पण करने के बाद कहीं।
उन्होंने कहा कि गंगेश ने समसामयिक घटनाओं एवं समस्याओं को विषय वस्तु बनाकर उसे जिस कलात्मकता के  साथ एकांकी संग्रह में गंभीरता दी है, वह उल्लेखनीय है। इनके  लेखन में भाषा की सरलता एवं भाषा की जो गहराई

है वह देखते ही बनती है। उनकी एकांकियों में भ्रूण हत्या, नारी-उत्पीड़न, सांप्रदायिकता, आतंकवाद, सामाजिक एवं राजनीतिक अवमूल्यन जैसी ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया है। इससे सामाजिक सुधार की दिशा में जो चलाए जा रहे अभियान  को बल मिल सकता है।
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अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार डॉ. जितेंद्र नाथ पाठक ने कहा कि एकांकी लेखन की दृष्टि से साहित्य के क्षेत्र में जो खालीपन था, उसे भरने की भूमिका डॉ. गंगेश ने निभाई। लोक-जीवन से जुड़ी विविध समस्याओं को प्रतिबिंबित करने वाली इनकी एकांकियां जनसरोकारों पर आधारित हैं। यही कारण है कि उनकी पंद्रह एकांकियों के इस संग्रह की सभी एकांकियां मंचन योग्य हैं। इन्होंने अपनी कृतियों से साहित्य समृद्ध किया है। उपन्यासकार रामावतार ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि गंगेश कुशल  नाट्य-निर्देशक हैं इसलिए उन्होंने अपनी एकांकियों का सृजन इस रूप में किया  है कि मंचन में कठिनाई न हो। इस दौरान बाल कलाकारों ने गंगेश की एकांकी ‘मुहब्बत का तोहफा’ ‘पशुुवृत्ति’ और ‘पाप-पंक’ का जीवंत मंचन किया। इस मौके पर प्रो. अशोक कुमार  पांडेय, रविनंदन सिंह , डॉ. समर बहादुर सिंह, डॉ. राम  नरायन तिवारी, डॉ. संतोष कुमार सिंह, लोकगीत गायक विजय बहादुर यादव,  शंकर सिंह यादव ने सम्बोधित किया। 
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