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बढ़ रही है साक्षरता लेकिन धीरे-धीरे, महिलाएं अब भी हैं बहुत पीछे

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साक्षरता दर बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के फलस्वरूप जिले में पिछले एक दशक के भीतर लगभग पांच फीसदी साक्षरता दर बढ़ी है। वैसे वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर जिले की साक्षरता दर 71.78 प्रतिशत है। इसमें पुरुषों की साक्षरता दर 82.80 प्रतिशत और महिलाओं की 60.30 प्रतिशत है।
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जनगणना के मुताबिक जिले की कुल जनसंख्या 36 लाख 15 हजार 515 है। इसमें 21 लाख 94 हजार 785 लोग साक्षर हैं। इसमें पुरुषों की संख्या 12 लाख 91 हजार 848 है और महिलाओं की संख्या नौ लाख दो हजार 937 है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में भदौरा ब्लाक की साक्षरता दर सबसे अधिक 74.97 है। इसमें पुरुषों की साक्षरता दर 85.39 प्रतिशत और महिलाओं की दर 63.83 है।
इसके बाद करंडा ब्लाक की साक्षरता दर सबसे अधिक 73.82 फीसदी है। इसमें पुरुषों की दर 84.94 और महिलाओं की दर 61.66 है। जबकि सबसे कम साक्षरता वाला ब्लाक बाराचंवर है। यहां की साक्षरता दर 68.09 है। इसमें पुरुषों की साक्षरता दर 79.55 और महिलाओं की साक्षरता दर 55.93 है।
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जिले में साक्षरता दर बढ़ाने के लिए जो कार्यक्रम चलाए गए उनमें साक्षर भारत मिशन 2012 का कार्यक्रम महत्वपूर्ण रहा। इस कार्यक्रम के तहत देश में साक्षरता दर को 80 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य था। इसमें देश के सात करोड़ और प्रदेश के एक करोड़ 82 लाख निरक्षरों को साक्षर किया जाना था। इस कार्यक्रम के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया।
इसके अलावा महिलाओं की साक्षरता दर बढ़ाने के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोले गए। जिले में 14 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इससे इतर राष्ट्रीय स्तर पर बालिका शिक्षा कार्यक्रम चलाया गया। इन कार्यक्रमों से पूर्व साक्षरता दर बढ़ाने के लिए वर्ष 1978 से 1992 तक 15 से 35 वय वर्ग के निरक्षरों के लिए राष्ट्रीय प्रौढ़ शिक्षा का कार्यक्रम चलाया गया।
वर्ष 1990 से 2009 तक निरक्षरों के लिए संपूर्ण साक्षरता अभियान, उत्तर साक्षरता कार्यक्रम और सतत शिक्षा कार्यक्रम चलाया गया। इससे साक्षरता दर में आशातीत वृद्धि हुई। साक्षरता विद्या की सीढ़ी, ज्ञान बांटती पीढ़ी दर पीढ़ी। साक्षरता के इस संदेश के साथ साक्षरता दर में निरंतर वृद्धि हो रही है।
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