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शराब तस्करी का खेल: रात दो बजे खुलती हैं तीन दुकानें, एक घंटे में हो जा रही चार लाख की बिक्री

Sat, 06 Dec 2025 03:31 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

Ghazipur News: शराब तस्करी के खिलाफ कितनी भी सख्ती हो लेकिन बिहार में शराब तस्करी करने वालों का धंधा चल ही रहा है। हैरान करने वाली बात तो ये है कि इस धंधे में केवल पुरुष ही नहीं महिलाएं व युवतियां भी शामिल हैं। 
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ऐसे की जा रही शराब की तस्करी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में शराब तस्करी करने वाले तस्कर 'तू डाल- डाल तो मैं पात- पात' की कहावत चरितार्थ कर रहे हैं। तमाम सख्ती और कार्रवाई के बावजूद आधी रात के बाद तस्करी का काला धंधा शुरू किया जाता है। रोज रात दो बजे से तीन बजे शराब की दुकानें खुल रह रही हैं और एक घंटे में ही करीब चार लाख से अधिक की बिक्री कर दुकान बंद हो जा रही हैं। 

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बक्सर, दानापुर व पटना के इलाकों से तस्कर भी रात 11 बजे तक स्टेशन पहुंच जा रहे हैं। आधी रात के बाद शराब बोरे और बैग में भरकर चार बजे भोर तक ट्रेन से गंतव्य के लिए रवाना हो जा रहे हैं। तस्करी में युवक व पुरुष ही नहीं महिलाएं और युवतियां भी बड़े पैमाने पर शामिल हैं। 

दानापुर- पीडीडीयू रेलखंड के प्रमुख स्टेशन में शुमार दिलदारनगर रेलवे स्टेशन बिहार प्रांत से आने वाली करीब 22 जोड़ी पैसेंजर, एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव होता है। स्टेशन के करीब 700 से 800 मीटर के दायरे में ही अंग्रेजी शराब की तीन दुकानें हैं। 

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तस्कर आने से पहले फोन से दुकानदारों से सीधे संपर्क करते हैं। यहीं नहीं रात 11 बजे तक बड़ी संख्या में बिहार से विभिन्न ट्रेनों के माध्यम से तस्कर पहुंच जाते हैं। इसके बाद दुकानों के बाहर बैठकर खुलने का इंतजार करते रहते हैं, जैसे ही रात में घड़ी की सूई दो पर पहुंचती है, तीनों दुकानें खुल जाती हैं। 

हर दुकान पर 20 से 25 तस्कर पहुंच जाते हैं। आर्डर के मुताबिक शराब की खरीदारी करने के बाद कभी दुकानों के पास तो कभी सड़क की पटरियों पर शराब की बोतलों को पैक करते हैं। रात तीन बजे तक एक घंटे पूरे इतमीनान से प्लास्टिक के बोरे और पिठ्ठू बैग में कागजों में शराब रखते हैं। ताकि टकराने की आवाज न हो। बोरा और बैग की सिलाई करते हैं। इसके बाद सुपरफास्ट ट्रेनों के आने का इंतजार करते हैं। 

जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर पहुंचती है, तस्कर प्लेटफॉर्म से दूर रूकने वाले डिब्बों में चढ़कर रवाना हो जा रहे हैं। यह पूरा धंधा भोर के करीब चार बजे तक चलता रहता है। गौर करने वाली बात है कि जिम्मेदारों को इसकी भनत तक नहीं लगी पाती।

फोन व व्हाट्सएप पर ऑर्डर-एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दुकानदारों के पास ऑर्डर फोन व व्हाट्सएप से पहले ही पहुंच जाता है। सिर्फ थैला अथवा बोरा लेकर पहुंचना रहता है। तस्कर खाली हाथ आते हैं, उनके पास कोई सामान नहीं होता है,ताकि कोई शक न हो। दुकान पर पहुंचते ही आर्डर के मुताबिक शराब की बोतलें मिल जाती हैं।
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क्या बोले अधिकारी

निर्धारित अवधि के बाद शराब की दुकान न खुलने का सख्त निर्देश है। साथ ही समय सीमा का पालन किया जाए, इसकी चेतावनी जारी की गई है। जल्द ही टीम गठित कर ऐसे दुकानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। -राजेश त्रिपाठी, जिला आबकारी अधिकारी गाजीपुर

तीन माह पहले ही पोस्ट पर तैनाती हुई है। तब से लगातार कार्रवाई चल रही है। अब तक 40 तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। कैसे ट्रेनों में चढ़कर तस्कर रवाना हो रहे हैं, लगातार निगरानी जारी है। जल्द ही अभियान चलाकर ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। -गणेश सिंह राणा, आरपीएफ पोस्ट दिलदारनगर

आबकारी, जीआरपी और आरपीएफ के साथ मिलकर अभियान चलाकर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में भी शराब तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। -डॉ. ईरज राजा, एसपी गाजीपुर
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