गाजीपुर। दुर्घटना में मृत बीमाधारक के परिजनों को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को पांच लाख रुपये दो महीने के भीतर भुगतान करना होगा। मृत बीमाधारक को दुर्घटना मृत्यु लाभ का भुगतान नहीं करने पर यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सुजीत कुमार श्रीवास्तव, सामान्य सदस्य रण विजय मिश्र और महिला सदस्य दीपा रानी की पीठ ने दिया है। इसके साथ ही मानसिक, शारीरिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति तथा वाद खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अलग से देने के निर्देश दिए हैं।
पीठ ने कहा कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान बीमा पॉलिसी की ग्रेस पीरियड को लेकर भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की ओर से दी गई विशेष राहत का लाभ बीमा पॉलिसी से जुड़े राइडर पर भी लागू होगा। आयोग के अनुसार, कोरोना काल में सामान्य ग्रेस पीरियड को विशेष परिस्थितियों में बढ़ाकर 31 मई 2020 तक किया गया था। संबंधित सर्कुलर में राइडर अथवा दुर्घटना मृत्यु लाभ को इस राहत से बाहर रखने का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। ऐसे में बेसिक पॉलिसी से जुड़े राइडर को विस्तारित ग्रेस पीरियड का लाभ नहीं देना सेवा में कमी माना गया।
19 मई 2020 को सड़क हादसे में हुई थी मौत
परिवादी व रामपुर, गाजीपुर निवासी अंजू यादव ने बताया कि उसके पति अभिमन्यु यादव ड्राइवर थे। उन्होंने एलआईसी की सैदपुर शाखा से पॉलिसी ली थी। 19 मई 2020 को जबलपुर स्थित एनएच-7 पर मोटर दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद अंजू यादव ने क्लेम के लिए आवेदन किया। एलआईसी ने बीमित धनराशि और बोनस का भुगतान कर दिया, लेकिन दुर्घटना मृत्यु लाभ का भुगतान नहीं किया। अंजू ने एलआईसी के निर्णय के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दाखिल किया।