नदियों का बढ़ता प्रदूषण समाज की बड़ी समस्या है। औद्योगिक विकास ने नदियों को बुरी तरह प्रदूषित करना प्रारंभ कर दिया है। गंगा सहित इसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।
नदियां बुरी तरह से अपशिष्ट पदार्थों के प्रवाह से गंदे नदी नाले का रूप धरती जा रही हैं। ऐसे में मूर्ति विसर्जन के लिए चयनित विकल्प बेहतर है। इस प्रतीकात्मक विसर्जन को अपनाने में थोड़ी सी रूकावटेे आ रही हैं। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिए। जब-तक समाज के लोगों में गंगा सहित सहायक नदियों के प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए जागरूकता नहीं आएगी। तब-तक नदियों को प्रदूषण मुक्त नहीं रखा जा सकता है। इस संबंध में अधिवक्ता अशोक पांडेय ने कहा कि गंगा के साथ सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सभी लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। अधिवक्ता मनोज सिंह ने कहा कि गंगा में मूर्ति विसर्जन न किया जाए। इसके लिए विकल्प के तौर पर तालाब और पोखरों को अपनाया जाए। अधिवक्ता सुरेंद्र चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदूषण मुक्त रखने के साथ आने वाली पीढियों को बीमारी मुक्त रखने के लिए यह जरूरी है कि मूर्ति विसर्जन का प्रतीकात्मक विकल्प तालाब और पोखरे को बनाना चाहिए। अधिवक्ता राजेंद्र कुशवाहा ने कहा कि समाज के सभी वर्ग जब तक इसके प्रति जागरूक नहीं होंगे। तब-तक गंगा के साथ सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त रखना संभव नहीं होगा।