राजकीय परिवहन निगम की खटारा बसों और सैदपुर में यातायात संसाधनों की कमी के चलते यात्री परेशान और हलकान हैं। ऐसे में बसों में सफर करना उनके लिए मजबूरी भरा है। सैदपुर भौगोलिक रूप से कई आंचलिक क्षेत्रों से जुड़ा है। तहसील मुख्यालय होने के कारण यहां से प्रतिदिन वाराणसी एवं जिला मुख्यालय के अलावा अन्य कस्बाई क्षेत्रों के लिए हजारों लोग आवागमन करते हैं। यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों का घंटों इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद वाहन नहीं मिलते हैं। निजी बस चालकों की मनमानी से ऊब चुके यात्री परिवहन निगम की बस पर भरोसा ज्यादा करते हैं, लेकिन मौजूदा समय में इनकी संख्या घट जाने और मार्ग पर अच्छी बसों की जगह पर खटारा बसों को लगा दिए जाने से यात्री निराश हैं। किसी समय वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर 24 से अधिक परिवहन निगम की बसें चलती थीं। जो सिमट कर आधी रह गई हैं। गोरखपुर, मऊ एवं बलिया डिपो की बसें भी इसी मार्ग से सैदपुर होकर वाराणसी के लिए जाती हैं, लेकिन दूर की बसें राजमार्ग हाईवे से होते हुए नगर के बाहर से निकल जाती हैं। इसका लाभ स्थानीय यात्रियों को नहीं मिल पाता। दूसरी ओर कोतवाली सैदपुर से लगायत नसीरपुर तक तीन किलोमीटर की सड़क क्षतिग्रस्त होने से रोडवेज बसें नगर की ओर नहीं आती हैं। यात्रियों ने इस मार्ग पर संसाधन बढ़ाने एवं परिवहन निगम की बसों के संचालन में सुधार की मांग की है।