गाजीपुर। मन माफिक बरसात नहीं होने तथा पिछड़ रही खेती को देखते हुए किसानों ने अब खेतों का रुख कर लिया है। धान की नर्सरी डालने के साथ ही कहीं कहीं रोपाई का काम भी शुरू हो गया है। इसके साथ ही अरहर, ज्वार, बाजरा की फसल की बुआई भी होने लगी है। हालांकि अगर आगे अच्छी बरसात नहीं हुई तो फसलों को बचाने में किसानों को दिक्कतें होगी।
मई के दूसरे सप्ताह से धान की नर्सरी डाली जाती है। आकड़ों की माने तो 15 जून तक धान की नर्सरी का काम पूरा हो जाता है। 15 से 22 मई तक 20 फीसदी, 31 मई तक 50 फीसदी, सात जून तक 90 फीसदी तथा 15 जून तक सौ फीसदी नर्सरी का काम पूरा हो जाना चाहिए। नर्सरी 25 से 30 दिनों में रोपाई लायक हो जाती है। समय से नर्सरी डालने वाले किसानों की पौध रोपाई लायक हो चुकी है। जिले में धान,ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन, तिलहन आदि खरीफ के फसलों की खेती होती है। इसमें एक लाख 56 हजार 629 हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। इसमें जमानिया और सेवराईं तहसीलों में अधिक उत्पादन किया जाता है। हरी सब्जियों को उगाने के साथ ही फलों की खेती को भी किसान पारंपरिक तौर पर करते हैं। दुबिहां संवाददाता के अनुसार हरदासपुर ,ऊंचाडीह, दुबिहाँ, नेवदा, कमसड़ी, गोविंदपुर आदि गांवों के किसानों ने धान की रोपाई शुरू कर दी है। किसानों का कहना है कि धान की नर्सरी अधिक दिन हो जाने पर बेकार हो जाती है। बाराचवर क्षेत्र में धान की फसल के साथ ही अरहर,बाजारा और ज्वार की खेती की जाती है। इस समय क्षेत्र की कई नहरें सूखी है। नलकूप खराब है ऐसे में भी किसान जी तोड़ मेहनत कर खेती में जुटे हुए है।
बर्बाद हो रही अगैती नर्सरी
बारा। जून माह में बारिश न होने से धान की रोपाई पिछड़ती जा रही है। अगर दो -चार दिन में जोरदार बारिश नहीं हुई तो अगैती धान की नर्सरी सूख कर बर्बाद हो जाएगी। अभी अधिकतर किसान खेतों में पलेवा नहीं होने से भूरपूर रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। नहरों में पानी न आने से भी किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन किसानों के पास निजी नलकूप हैं, वे किसी तरह से कुछ क्षेत्रफल में रोपाई कर चुके हैं लेकिन, तेज धूप व उमस से धान की रंगत फीकी पड़ती जा रही है। भदौरा के कृषि विभाग के अधिकारी उदय राज सिंह ने किसानों को सलाह दी कि अगैती धान की नर्सरी को उखाड़कर दूसरे स्थान पर लगाएं। इस विधि से तैयार नर्सरी को 15 दिन तक रोका जा सकता है। इस बीच बारिश हो जाए या नहरों में पानी आ जाए तो उसकी रोपाई कर दें। इससे पैदावार में वृद्धि के साथ बीज भी कम लगता है और काफी मात्रा में क्षेत्रफल को कवर किया जा सकता है।
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सूखी है नहरें और राजवाहे
दुबिहां। क्षेत्र में सिंचाई संसाधनों की समस्या करीब एक दशक पुरानी है। जो इस समय ज्यादा खराब है। क्षेत्र के दलपतपुर, राजवाहा, रामदासपुर राजवाहा,समेत कई माइनरों में वर्षों से पानी नहीं गया है।इससे दर्जनों गांवों के सैकड़ों बीघे खेतों की सिंचाई होती थी। इस बार नालों और कुलाबों को साफ नहीं कराया गया है। सरकारी नलकूप भी देखरेख के अभाव में बदहाली का शिकार हैं। कई की मोटर गायब है तो कई नलकूपों की बोरिंग फेल हो चुकी है।
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