गाजीपुर। जिले की प्रमुख नदी गंगा में चौथे दिन भी तेजी का क्रम बना रहा। गंगा करीब डेढ़ सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं। हालांकि खतरा अभी काफी दूर है, लेकिन तटवर्ती लोग सहमे हुए हैं। उधर मगई का तेवर भी काफी तीखा है। कई इलाकों में नदी किनारे को छोड़ कर खेतों को डूबोने लगी हैं। डूब क्षेत्र में बोई गई सब्जी की ओर नदी तेजी से बढ़ रही है। इससे सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। इसके चलते तटवर्ती दर्जनभर गांव के लोग सहम गए हैं।
शनिवार की सुबह गंगा का जलस्तर 55.310 मीटर पर पहुंच गया था जबकि खतरे का निशान 63.105 मीटर है। शहर के घाटों पर पानी चढ़ने लगा है। शहर के कलेक्टर घाट, स्टीमर घाट, चीतनाथ घाट, ददरी घाट, नवापुरा घाट, बड़ा महादेवा घाट और सिकन्दरपुर घाट की निचली सारी सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं। भीमापार संवाददाता के अनुसार गंगा में पिछले साल आई बाढ़ से लोग अभी ऊबर नहीं पाए है। इस साल भी गंगा के बढ़ने से लोग सहमे हुए है। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ की विभीषका देखने के बाद भी बाढ़ को रोकने की कोई स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है। जबकि खरौना गांव जिले में गंगा नदी का प्रवेश द्वार है। लेकिन बाढ़ का पानी जब जिले में प्रवेश करने के बाद अपने रौद्र रूप में आ जाता है। जंगीपुर संवाददाता के अनुसार मंगई में बढ़ाव जारी है। अब पानी खेतों में फैलने लगा है। हालांकि अभी खतरे जैसी कोई बात नहीं है लेकिन पानी बढ़ने से किसान चिंतित हो गए हैं। क्षेत्र के पहेतिया, दिलमनपुर, गुम्मा, शेखपुर, आरीपुर आदि कुछ स्थानों पर मगई के बढ़ाव से चिंता बनी हुई है। दुबिहा संवाददाता के अनुसार नोनहरा, मुहम्मदाबाद, हाटा, परसा, जोगा, करीमुद्दीनपुर, सियाड़ी, मसौनी आदि क्षेत्रों में भी नगंई नदी का पानी चढ़ान पर है। कठवामोड़ संवाददाता के अनुसार मंगई नदी में हल्का बढ़ाव दिख रहा है। इसके तट पर बसे अटवा आदि गांवों के लोगों की धुकधुकी बढ़ने लगी है। जिले में गोमती, टौंस, कर्मनाशा, बेसो, गांगी, भैंसही, उदंती आदि नदियां भी बहती हैं। बरसात के बाद सभी में पानी भर गया है।