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Ghazipur News: कानून की चाैकी पर कबाड़ की पार्किंग, थानों में जंग खा रहे वाहन

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बरेसर थाना परिसर में खड़े वाहनों की ​स्थिति - संवाद
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गाजीपुर। जनपद में 26 थाने हैं। लेकिन, मौजूदा वक्त में ये सभी कबाड़खाने में परिवर्तित हो चुके हैं। सीज व दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को निस्तारित नहीं किया जा रहा है। इससे थानों की सुंदरता को भी बट्टा लग रहा है। जनपद के 26 थानों में पांच से 10 वर्षों से एक हजार से अधिक चार पहिया व दो पहिया वाहन जंग खा रहे हैं।
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पुलिस द्वारा जब्त किए गए वाहन कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता की वजह से थानों में धूल फांक रहे हैं। थानों में जब्त किए गए वाहनों में दो पहिया वाहन ज्यादा हैं। ट्रक हल्के वाहन भी थानों में जगह घेरे हुए है।
कई वर्षों से तेज धूप और बरसात की मार झेल रहे अधिकतर वाहन सड़ चुके हैं। जिन्हें कौड़ी के मोल भी नहीं बेचा जा सकता। जब्त वाहनों में कुछ चोरी के हैं तो कुछ को दुर्घटना के अंजाम में जब्त किया गया है। कुछ ऐसे ही वाहन हैं, जिनका अवैध सामान की तस्करी में प्रयोग किया गया है। बाइक वाले जोड़-घटाव करते हैं, तब पता चलता है कि कई वर्षों का रोड टैक्स, बीमा, इत्यादि का जुर्माना वाहन के बाजार मूल्य से अधिक हो रहा है।
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सैदपुर कोतवाली में थाने के अंदर और बाहर जंग खा रहे वाहन इस बात की गवाही देते हैं कि वर्षों से इनकी नीलामी व निस्तारण की प्रक्रिया नहीं हुई है। साथ ही कोतवाली के बाहर जंग खा पर भी सीज किए गए वाहन खड़े हैं।

कासिमाबाद कोतवाली परिसर में वाहन धूल फांक रहे हैं। इसमें सबसे अधिक संख्या दो पहिया वाहनों की है। गर्मी, बरसात व जाड़ा हर मौसम में वाहन इसी तरह पड़े रहते हैं।

थाने के बाहर खड़ा कराते हैं बड़े वाहन

गाजीपुर। जनपद के विभिन्न थानों की पुलिस की ओर से बड़े व भारी वाहनों को थाने के बाहर सीज कर सड़क पर खड़ा करा दिया जाता है। इसकी वजह, थानों में जगह की कमी होना है। थानों के प्रवेश द्वार पर जंग खाक किनारे वाहनों के सीज किए जाने से अक्सर दुर्घटना होने का भय बना रहता है। संवाद
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