रेवतीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य पर जननी सुरक्षा योजना की धनराशि में गड़बड़ी सामने आई है। जो धनराशि प्रसव के 48 घंटे के भीतर प्रसूता के खाते में पहुंच जानी चाहिए, वह दूसरे महीने भी खाते में नहीं पहुंची है। आशा बहुओं को भी उनका मानदेय नहीं मिला है। यह सब गड़बड़ी एक लेखा प्रबंधक की वजह से हुई है, जिस पर नौ महीने पहले ही मुकदमा लिखाने को कहा गया था लेकिन स्वास्थ्य महकमा उसे बचाने में लगा है।
जननी सुरक्षा योजना की धनराशि प्रसव के 48 घंटे बाद लाभार्थियों खाते में पहुंच जानी चाहिए। मगर रेवतीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की 165 लाभार्थी इस रकम के लिए दो महीने से विभाग का चक्कर काट रही हैं। अप्रैल से किसी के खाते में धनराशि नहीं भेजी जा सकी है। जननी सुरक्षा योजना की रकम का भुगतान पहले चेक से किया जाता था। तब चेक बनाने में मनमानी की जाती थी। इस समस्या के समाधान के लिए विभाग ने पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस ) लागू किया है, जिसके जरिए धनराशि लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है। प्रक्रिया आसान होने के बावजूद रेवतीपुर में वह बेमानी हो गई है।
विभाग ने इस पोर्टल के संचालन का जिम्मा लेखा प्रबंधक को सौंपा है और रेवतीपुर सीएचसी के लेखा प्रबंधक ने आईडी और पासवर्ड बदलकर छुट्टी ले ली है। लिहाजा किसी के खाते में भुगतान हो नहीं पा रहा है। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र तक ले जान वाली आशा बहुओं का भी मानदेय नहीं दिया गया है। यह सब यहां तैनात लेखा प्रबंधक आनंद कुमार की मनमानी की वजह से हो रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी मनीष कुमार ने लेखा प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई के लिए 12 मई को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एमपी सिंह को पत्र लिखा था। जननी सुरक्षा योजना और आशा बहुओं के मानदेय की रकम का भुगतान रुकने के मामले की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। एक सप्ताह के भीतर समिति को अपनी रिपोर्ट देनी थी लेकिन अवधि बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही बकाया धन का भुगतान हुआ।
लेखा प्रबंधक से भुगतान न होने के बारे में पूछताछ की गई। उनका कहना है कि पीएफएमएस पोर्टल का आईडी का कोड लॉक हो गया है, खुल नहीं रहा है। इसकी शिकयत 12 मई लिखित तौर सीएमओ से की गई है।- डॉ. मनीष कुमार, प्रभारी चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतीपुर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लेखा प्रबंधक आनंद कुमार ने बीते अगस्त माह में भी पीएफएमएस पोर्टल की आईडी बदल दी थी और छुट्टी पर चले गए थे। वे कई महीने नदारद रहे। इससे आशाओं और जेएसवाई के लाभार्थियों का भुगतान अटका था। भुगतान तब हुआ जब सीएमओ ने प्रभारी चिकित्साधिकारी से लेखा प्रबंधक खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया। मुकदमा आज तक नहीं लिखाया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एमपी सिंह ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना की धनराशि का भुगतान जल्द से जल्द करने को कहा गया है। हालांकि लेखा परीक्षक के खिलाफ जांच और कार्रवाई के बारे में पूछने पर उन्होंने चुप्पी साध ली। अब तक एफआईआर क्यों नहीं लिखी गई, इस पर भी वे कुछ बोलने को तैयार नहीं हुए।
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