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जल जीवन मिशन : जनरेटर में तेल नहीं, बिजली के भरोसे बस्ती वालों का पानी

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जल जीवन मिशन योजना में बैकअप की व्यवस्था सिर्फ कागजों में ही है। बिजली कटने या सोलर सिस्टम से करंट न मिलने पर जनरेटर चलाकर बस्तियों में जलापूर्ति कराने की व्यवस्था है। 365 दिन में बारिश और ठंड में 142 दिन जरूरत पड़ने पर जनरेटर चलाने का मानक है, लेकिन डेढ़ साल में 150 गांवों में जलापूर्ति के लिए जनरेटर चलाए नहीं गए। पंप ऑपरेटरों का कहना है कि जनरेटर चलाने के लिए डीजल ही नहीं मिलता है।
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जिले में 546 ग्राम पंचायतें हैं। हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की शुरुआत की। तीन चरण में 399 परियोजनाओं पर काम शुरू हुआ। 450 करोड़ की परियोजना का काम कार्यदायी संस्था वेलस्पन और जीइंफ्रा कर रही हैं। अब तक 190 परियोजनाओं से 150 गांवों में पानी की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। विशेष परिस्थिति में पानी की आपूर्ति के लिए पानी की टंकी के पास जनरेटर की व्यवस्था की गई है। लाखों की लागत से लगे जनरेटर कभी चलते ही नहीं। रविवार को हमारी टीम ने भदोही ब्लॉक के वेदमनपुर, जमुआं, चौरीखास, बरैला, चनईपुर, जगदीशपुर, जद्दूपुर, औराई के हुसैनीपुर, अभोली के रामनगर में पड़ताल की। इसमें कुछ बिजली तो कुछ सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले पंप हैं। मौसम खराब होने और बिजली कटने के बाद यहां रखे जनरेटर नहीं चलाए जाते। इससे बस्तियों में पानी की आपूर्ति ठप हो जाती है। चौरी खास में तैनात गार्ड रोशीलकांत दुबे ने कहा कि जनरेटर चलाने के लिए डीजल नही मिलता है। सोलर पैनल के सहारे जलापूर्ति करनी पड़ती है। इससे पांच हजार की आबादी प्रभावित होती है। औराई के हुसैनीपुर में पंप न चलने से तीन हजार की आबादी परेशान होती है। सबमर्सिबल पंप और हैंडपंप से लोग अपना काम निपटाते हैं। चौरी के वेदमनपुर और रोटहां में बिजली गुल होने पर 10 हजार की आबादी पानी के लिए परेशान होती है।

ढाई लाख तक के जनरेटर लगाए गए हैं
जल जीवन मिशन के पंप पर लगे जनरेटर की कीमत अलग-अलग है। पंप की क्षमता के हिसाब से जनरेटर की आपूर्ति होती है। पांच से सात केवीए के जनरेटर की कीमत सवा लाख से 1. 75 लाखतक होती है। 10 केवीए के जनरेटर ढाई से तीन लाख तक आते हैं। सभी परियोजनाओं पर जनरेटर की व्यवस्था की जानी है।
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केस-एक- भदोही के वेदमनपुर गांव में एक साल पूर्व परियोजना से पानी की आपूर्ति शुरू की गई। यहां पर सवा लाख रूपये का जनरेटर लगा है। मौसम खराब होने के बाद पानी की आपूर्ति ठप हो जाती है। जनरेटर आज तक नहीं चला।
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केस-दो- औराई के हुसैनीपुर में डेढ़ साल पहले पानी की आपूर्ति शुरू हुई। यहां भी सौर ऊर्जा से पंप चलाया जाता है। बारिश और ठंड में भी जनरेटर नहीं चलता। इससे पानी की आपूर्ति ठप हो जाती है।
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- जल जीवन मिशन की परियोजना में पंप चलाने के लिए जनरेटर की व्यवस्था है, लेकिन उसे चलाया नहीं जाता। जिससे बस्तियों में कई दिनों तक पानी आपूर्ति नहीं हो पाता। इसको चालू करवाना चाहिए।- इम्तियाज अंसारी, चौरी खास

- जल जीवन मिशन परियोजना की हालत ठीक नहीं है। पानी की टंकी, पाइपलाइन के कारण पहले ही समस्या जटिल है। जनरेटर न चलाने से दिक्कत और बढ़ जाती है।- अशोक चौधरी, वेदमनपुर
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एक नजर में जल जीवन मिशन
कुल परियोजनाएं- 399
अब तक पूर्ण - 190
पंप से सीधे आपूर्ति- 50
अधूरी परियोजनाएं- 209
कार्यदायी संस्था: जी इंफ्रा, वेलस्पन
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वर्जन
सभी परियोजनाओं में जनरेटर की व्यवस्था की जा रही है। जहां से पानी की आपूर्ति शुरू हो गई वहां वैकल्पिक व्यवस्था के लिए जनरेटर लगाए गए हैं। बारिश और ठंड में 142 दिन जरूरत पड़ने पर उनको चलाया जाना चाहिए। किन कारणों से उनको नहीं चलाया जा रहा है उसे पता लगाया जाएगा। बस्तियों तक पानी पहुंचाना प्राथमिकता में है। - राजबली, प्रभारी अधिशासी अभियंता जल निगम।
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