नगर और ग्रामीण इलाकों में रमाजन माह के चौथे जुमे पर मस्जिदें नमाजियों से भरी रहीं। पेश इमामों ने रमजान के तीसरे अशरे पर रोशनी डालते हुए एतिकाफ को अल्लाह से नजदीकी का जरिया बताया। नमाज के बाद मुल्क की तरक्की और अमनचैन की दुआएं मांगीं। शहर की मस्जिदों में जुमे की नमाज के लिए नमाजी समय से पहुंचने लगे थे। निर्धारित समय पर नमाज से पूर्व पेश इमामों ने रमजान की तीसरे अशरे जहन्नुम से आजादी पर रोशनी डाली। कहा तीसरे अशरे में अल्लाह तआला रोजेदारों के गुनाहों को माफ फरमाता है और उन्हें जहन्नुम की आग से निजात देने की बशारत देता है। बताया गया कि इस अशरे में लोगों को एतिकाफ में बैठ कर अल्लाह के नजदीक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए। एतिकाफ के दौरान की गई इबादत का सिला अल्लाह बेहतर से बेहतर देता है। तकरीर के बाद बाद खुत्बा हुआ और फिर नमाज अदा की गई। बारा : क्षेत्र की जामा मस्जिद, हाजी साहब वाली मस्जिद, बाजार मस्जिद, गुलशने बाबर मस्जिद, मझलीपट्टी मस्जिद, मस्तान बाग मस्जिद, रौजा मस्जिद समेत अन्य मस्जिदों में जुमे की नमाज अकीदत के साथ पढ़ी गई। उलेमा ने लोगों को एहितकाफ के बारे में बताया। कहा अगर बस्ती में किसी एक शख्स ने मस्जिद में एतिकाफ किया तो उसका सवाब सभी बस्ती वालों को मिलता है। बारा के जामा मस्जिद के इमाम हाफिज जाकिर ने कहा कि रमजान के बाद आने वाली ईद रोजेदारों के लिए अल्लाह का तोहफा है। उधर, मस्जिदों के बाहर जकात लेने के लिए खड़े गरीबों को लोगों ने जकात की रकम दी।