फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संस्कृति के लिए मन समझना जरूरी

विज्ञापन
विज्ञापन
राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘लोक साहित्य एवं संस्कृत के आयाम भारतीय परिप्रेक्ष्य’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ आकाशवाणी की वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रसिद्ध लोक साहित्यकार प्रो. नीरजा माधव ने किया। उन्होंने कहा कि वेद से पहले लोक आता है। महर्षि वाल्मीकि ने लोक से प्रेरित होकर ही रामायण की रचना की। हमारे तीज-त्यौहार हमारी लोक परंपरा को ही दिखाते हैं। भारतीय मन के बिना भारतीय लोक संस्कृति को समझना मुश्किल है।
विज्ञापन

इसके पहले जीवनोदय शिक्षा समिति के सदस्य एवं समारोह के संयोजक काजी फरीद आलम ने सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। मारीशस से आईं डॉ. विनोद बाला एवं तुर्की से आईं प्रो. एसटी जस्सल ने अपने लोक आख्यान के माध्यम से इसके वैश्विक स्वरूप को स्पष्ट करते हुए लोक की ताकत एवं महत्ता को रेखांकित किया।
वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु उपाध्याय ने कहा कि जिस देश की विरासत सुरक्षित नहीं, वह देश सुरक्षित नहीं हो सकता। अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. सविता भारद्वाज ने कहा कि जो प्राकृतिक रूप से स्वत: ढंग से विद्यमान है वही लोक है। भारतीय लोक ताकतवर हैं। हमारे संस्कारों में हमारा लोक उभरकर सामने आता है। आज लोक कलाकारों को बाजार भी मिला है, लेकिन हमें बाजार से अपने लोक को बचाना होगा। इस अवसर पर उच्च शिक्षा के लिए डॉ. पीसी अभिलाष, डॉ. भुनेश्वर दुबे, प्राथमिक शिक्षा के लिए रणधीर यादव, आशीष दुबे तथा सरस्वती विद्या मंदिर के रामउग्रह पांडेय का संस्था की तरफ से सम्मान किया गया।
विज्ञापन

सेमिनार के प्रथम सत्र का संचालन डॉ. निरंजन कुमार यादव एवं संयोजन में सहयोग डॉ. शिव कुमार, डॉ. जितेंद्रनाथ राय, डॉ. शेर खान ने किया। समारोह के द्वितीय सत्र में डॉ. विश्वनाथ मिश्र, डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. लालबहादुर यादव, डॉ. रामबहादुर मिश्र ने लोक के संबंध में विचार व्यक्त किया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. शांतिस्वरूप सिंह तथा संचालन डॉ. राकेश पांडेय एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रोफ़ेसर डॉ. अनिता कुमारी ने किया। इससे पहले अतिथियों का स्वागत संस्था के अध्यक्ष डॉ. रामनारायण तिवारी ने किया।
लोक कलाएं देखकर मुग्ध हुए लोग
गाजीपुर। सेमिनार में लोक कलाओं का प्रदर्शन एवं संगीतकारों का जमावड़ा आकर्षण का केंद्र रहा। संस्कृत संध्या के तहत तीसरे सत्र में लोक कलाओं का मनभावन प्रदर्शन रहा। इसमें पवन बाबू ने देवी गीत, साल्टू राम एवं साथियों ने धोबी नृत्य, रामसेवक खरवार ने कहारवा नृत्य तथा मदन राय, केके पंडित, रतन ओझा, जियालाल ठाकुर एवं आशीष दुबे ने गायन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. श्रीकांत पांडेय एवं अमरीश चौबे ने संयुक्त रूप से किया। तीसरे सत्र की अध्यक्षता सौदागर सिंह ने की। कार्यक्रम में डॉ. सानंद सिंह, प्रो. आनंद सिंह, डॉ. राघवेंद्र पांडेय, प्रो. एके मिश्रा, डॉ. सुशील कुमार तिवारी, डॉ. अविनाश शरण राय आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें