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Ghazipur News: आंगनबाड़ी है या गोदाम, कहीं भूसा, कहीं खड़ी है बाइक, बच्चों का ठिकाना गायब

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गाजीपुर। जिले में नौनिहालों की पढ़ाई और पोषण के लिए 4127 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, लेकिन कई जगह हकीकत इससे उलट है। कहीं बच्चे खुले में बैठ रहे हैं तो कहीं केंद्र के भवन में भूसा रखा है तो कहीं वाहन पार्किंग या कंप्यूटर सेंटर चलाया जा रहा है। कई केंद्रों पर तो दिनभर ताला लटका रहता है। बृहस्पतिवार को पड़ताल में यह हकीकत सामने आई। जिले के 16 विकास खंडों में 2,65,493 बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत हैं।
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इनमें 6 माह से 3 वर्ष तक 1,48,398 और 3 से 5 वर्ष तक 1,17,095 बच्चे शामिल हैं। बच्चों की देखरेख के लिए 3974 कार्यकर्ता और 2775 सहायिकाएं तैनात हैं, लेकिन 153 कार्यकर्ता और 1352 सहायिकाओं के पद रिक्त हैं। आंकड़ों के अनुसार 500 केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं, जबकि 32 भवन जर्जर हैं और 53 केंद्रों का निर्माण जारी है।
22 साल पुराना अधूरा आंगनबाड़ी भवन : जखनिया। क्षेत्र के बारोडीह गांव में प्राथमिक विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र का भवन 22 साल बाद भी अधूरा और जर्जर हालत में है। भवन का निर्माण वर्ष 2003-2004 में कराया गया था, लेकिन आज तक न तो दीवारों पर प्लास्टर कराया गया और न ही फर्श का निर्माण पूरा हो सका। बाल विकास परियोजना अधिकारी बिन्नी यादव ने बताया कि भवन अब तक हैंडओवर नहीं हुआ। फिलहाल बच्चों की पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय बारोडीह के भवन में की जा रही है।
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