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नहरों में पानी ही नहीं तो किसान कैसे डालें धान की नर्सरी

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सुहवल। सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते ताड़ीघाट राजवाहा में अभी तक पानी न छोड़े जाने के चलते किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। इस महंगाई के दौर में वह डीजल चलित मशीनों से किसी तरह खेतों तक पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं। सिंचाई विभाग रोस्टर के मुताबिक नहरों में पानी छोड़ने का दावा कर रहा है लेकिन इससे किसानों को जरा भी राहत नहीं मिल रही है। राजवाहा के किनारे किसानों की मुख्य फसल धान है। यहां की मिट्टी भी धान की खेती के लिए काफी मुफीद है, लेकिन नहर में जरूरत के समय पानी की आपूर्ति नहीं होने से किसानों को धान की खेती करने में समस्या आ रही है। ताड़ीघाट राजवाहा जमानिया से मतसा, ढढ़नी, मिर्जापुर, रमवल, सुहवल होते हुए डेढ़गांवा तक जाती है। इस राजवाहे से सैकड़ों किसानों की हजारों बीघे खेतों की सिंचाई होती है। किसानों ने बताया कि विभाग इतना बेपरवाह बना हुआ है कि जब पानी की जरूरत महसूस किसानों को होती है तो समय से नहीं मिल पाता। जरूरत न रहने पर विभाग पूरी क्षमता से पानी छोड़ देता है, जिसकी उस समय कोई जरूरत नहीं रहती है। राजवाहों और माइनरों की सफाई के नाम पर विभाग महज कोरम पूरा करता है, जिस कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। ताड़ीघाट राजवाहा के अवर अभियंता चंदन कुमार ने बताया कि विभाग की पहली प्राथमिकता किसानों के खेतों तक समय से पानी पहुंचाना रहता है। राजवाहा में पानी पूरी क्षमता के साथ छोड़ दिया गया है, जल्द ही पहुंच जाएगा।
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