सेमरा के कटान पीडि़तों ने बुधवार को उपजिलाधिकारी के मुलाकात कर उन्हें पत्रक सौंपा और उच्च न्यायालय की ओर से 10 अक्तूबर 2014 को पीडि़तों के संबंध में दिए गए निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की।
पीडि़तों ने कहा कि हम लोग तीन वर्ष से खुले आसमान से नीचे बंजारों-सा जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। हम लोगों ने लोकतांत्रिक तरीके से दर्जनों बार स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला मुख्यालय होते हुए मंडलायुक्त के यहां धरना-प्रदर्शन, तहसील दिवस, जनता दर्शन के साथ-साथ क्रमिक और आमरण अनशन तक किया।
तत्कालीन राहत आयुक्त वैंकटेश्वर लू ने अपने दौरे के दौरान कटान से बेघर हुए सभी परिवारों को एक-एक लोहिया आवास देने का वादा किया था। उच्च न्यायालय में भी जनहित याचिका दायर की गई। इसमें न्यायालय ने अपने आदेश में 10 अक्तूबर 14 को शासनादेश का संदर्भ लेते हुए कटान पीडि़तों की मांगों का जिलाधिकारी से दो माह में निस्तारण करने का आदेश पारित किया। इसकी समयसीमा भी समाप्त हो गई, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। कटान पीडि़त कड़ाके की ठंड में राहत शिविरों में रहने के लिए बाध्य है।
इस मौके पर गांव बचाओ आंदोलन के संयोजक प्रेमनाथ गुप्त, मनोज कुमार, काशीनाथ, डा. योगेश गुप्त, अमरनाथ, मंती देवी, मुगनी देवी, मुखराज, शिवकुमार आदि उपस्थित थे।