वाराणसी की एंटी करप्शन टीम ने पति और पत्नी के बीच संबंध विच्छेद के एक मामले में दरोगा को 30 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। यह कार्रवाई सोमवार को बहरियाबाद के उकरांव गांव स्थित एक दूकान पर की गई।
हालांकि दरोगा सुदामा प्रसाद का कहना है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। बहरियाबाद क्षेत्र के गहनी गांव निवासी विजय शंकर ने 13 अगस्त को वाराणसी की एंटी करप्शन सेल को प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि उनकी पत्नी
मंजूलता ने उनके खिलाफ बहरियाबाद थाने में तहरीर दी है। दंपती के बीच संबंध विच्छेद का मामला चल रहा है। पत्र में उन्होंने लिखा कि इस मामले की जांच कर रहे बहरियाबाद थाने के उपनिरीक्षक सुदामा प्रसाद मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज न
करने के एवज में 50 हजार रुपये मांग कर रहे हैं। एंटी करप्शन टीम की योजना के अनुसार शिकायतकर्ता विजय शंकर और दरोगा सुदामा प्रसाद में 30 हजार रुपये में डील तय हुई। सोमवार को अपराह्न साढ़े तीन बजे विजय शंकर ने उकरांव
चट्टी स्थित मोबाइल और कंप्यूटर की अपनी दूकान पर रुपये देने के लिए दरोगा सुदामा प्रसाद को बुलाया। विजय शंकर ने दरोगा को एंटी करप्शन सेल से मिले एक-एक हजार और पांच-पांच सौ के नोटों की 30 हजार की गड्डी ज्यों थमाई,
दूकान के बाहर खड़े एंटी करप्शन सेल के अधिकारियों ने उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी दरोगा का जब हाथ धुलवाया गया तो नोट में लगे केमिकल के चलते उसका हाथ लाल हो गया। आरोपी दरोगा से सैदपुर थाने में टीम के
अधिकारी घंटों पूछताछ करते रहे। एंटी करप्शन टीम में प्रभारी निरीक्षक प्रेमशंकर दुबे, रामसागर प्रसाद, राजकुमार पाल, ओमप्रकाश यादव, नरेंद्र कुमार सिंह, राजकुमार पाल आदि शामिल रहे।