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आपरेशन कायाकल्प: जिले के 1674 प्राथमिक विद्यालयों के बाथरूम व टायलेट में जलापूर्ति की व्यवस्था नहीं

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गाजीपुर। ‘आपरेशन कायाकल्प’ में विद्यालयवार कराए गए विकास कार्य धरातल पर नहीं दिख रहे हैं। छात्र/छात्राएं अब भी सुविधाओं से वंचित हैं। जिले के कुल 2269 विद्यालयों में विकास कार्यो को पूर्ण करना था। लेकिन अब भी कहीं रास्ते की समस्या है, तो कहीं बाथरूम व टायलेट की। कहीं विकलांग छात्रों के लिए रैंप व रेलिंग नहीं है, तो कहीं विद्युतीकरण नहीं हुआ है। कक्षा में श्यामपट्ट और कोरोना काल में हैंडवाश और साबुन तक उपलब्ध नहीं हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वे रिपोर्ट को माने तो करीब 1000 प्राथमिक विद्यालय अब भी विद्युतीकरण से वंचित हैं। किसी भी विद्यालय में श्यामपट्टक नहीं है, 1365 विद्यालयों में शुद्ध पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। 1674 विद्यालयों के टायलेट और बाथरूम में जलापूर्ति की व्यवस्था नहीं है। 1587 विद्यालयों के बाथरूम एवं टायलेट जर्जर हैं। इनका सुंदरीकरण नहीं कराया गया है। कोरोना काल में सभी विद्यालयों पर हैंडवाश, सैनिटाइजर एवं साबुन रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन 1673 विद्यालयों ने इसकी जरूरत आज तक नहीं समझी। लापरवाही आज भी बरती जा रही है। सर्वे रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि छात्रों को पढ़ाने के लिए सबसे जरूरी श्यामपट्ट तक किसी भी विद्यालय में नहीं है। 2269 विद्यालयों में रंगाई पुताई नहीं कराई गई है। विद्यालय बाहर से लकदक जरूर हैं, लेकिन अंदर समस्याएं ही समस्याएं हैं। विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों के लिए कोई व्यवस्था तक नहीं है। जबकि आपरेशन कायाकल्प के तहत ऐसे छात्रों के लिए स्कूलों में रैंप और रेलिंग की व्यवस्था की जानी थी, लेकिन अभी तक नहीं की गई है। स्कूल की कक्षाओं में जाड़ा, गर्मी और बरसात की वजह से आए दिन छात्रों को रोशनी की समस्याओं से जूझना पड़ता है। लेकिन 415 विद्यालयों में जहां वायरिंग का कार्य सालों से अधूरा है, वहीं 997 विद्यालय में विद्युतीकरण का काम पूरा नहीं हुआ है। जिलाधिकारी एमपी सिंह ने बताया कि ‘आपरेशन कायाकल्प’ के तहत जनपद के प्राथमिक विद्यालयों में होने वाले कार्यो की समीझा लगातार की जा रही है। अधूरे कार्यो को बहुत जल्द पूरा कराया जाएगा।
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