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महंगाई ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

Thu, 16 Jun 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला,गाजीपुर
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महंगाई ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
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महंगाई कम करने की सरकारी कवायद परवान चढ़ती नहीं दिख रही है। अनाज से लेकर सब्जियों, फलों की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं।  जिससें आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ता जा रहा है। अरहर, चना और मटर की दाल के साथ ही सलाद और सब्जियों में प्रयोग में आने वाले टमाटर के दाम भी आसमान छू रहे हैं। कभी महंगाई के आंसू रुलाने वाला प्याज इस समय लोगों को हंसा रहा है, तो हमेशा सस्ता बिकने वाला टमाटर दाम सुनने के बाद चेहरा लाल कर दे रहा है।
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महंगाई का मीटर पिछले करीब दो माह से उतर-चढ़ रहा है। 15 दिन पहले जहां अरहर की दाल 135 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब 145 से लेकर 165 रुपये किलो बिकने लगी है। चने की दाल 80 के बजाय 90 रुपये किलो बिक रही है। 38 रुपये बिकने वाली चीनी के भाव वर्तमान में 42 रुपये हो गया है। इसी तरह अन्य खाद्य सामग्री के दामों में इजाफा हुआ है।इस समय सब्जियों के दाम में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है, लेकिन टमाटर और लेहसुन का रेट हाई होने से इसका स्वाद लेने में लोगों को एक बार सोचना पड़ रहा है।

सब्जियों और सलाद में लोग इसका प्रयोग करने से कतराने लगे हैं। हां कभी महंगाई की आंसू रुलाने वाले प्याज आज लोगों को हंसा रहा है, इससे लोग इसका प्रयोग दिल खोलकर कर रहे हैं। शहर के मिश्रबाजार किराना व्यवसायी चंदन गुप्ता ने बताया कि अमीरों पर तो महंगाई का असर नहीं है, लेकिन मध्यम लोगों के जेब पर इसका प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। मध्यम परिवार के लोग, जो पहले हफ्ते में सात दिन अरहर या चना की दाल का सेवन करते थे, अब महंगाई की वजह से दो से तीन दिन वह इसका स्वाद लेते दिखाई दे रहे हैं।
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मिश्रबाजार के सब्जी विक्रेता पंकज ने बताया कि टमाटर की अच्छी पैदावार न होने से इसका रेट आसमान छू रहा है। नासिक से टमाटर की आमद होने पर इसके दाम में काफी कमी आ जाएगी। स्टेशन रोड निवासी राजू न बताया कि सालों से हम महंगाई की मार झेलते आ रहे हैं। केंद्र तथा प्रदेश सरकार गुरबत में जीने वालों के बारे में कोई कानून नहीं बनाती है। किसान हाड़तोड़ मेहनत कर खेत से अच्छी उपज करता है, तो उसकी मजदूरी तक नहीं निकल पाती।

जबकि उसी से बड़े कंपनी वाले लाखों कमाते हैं। सरकार को खाद्यान तथा सब्जी का रेट पूरे साल के लिए तय कर देना चाहिए। जिससे लोग चैन से अपनी जीविका चला सकें।मुड़वल निवासी अरविंद कुशवाहा ने बताया कि सब्जी व दाल जब किसान के यहां पैदा होती है, तो उस समय कीमत अच्छी नहीं मिलती और किसान को अपना माल औने-पौने दाम में बेचना पड़ता है। लेकिन यही सब्जी, आलू, दाल, प्याज, लेहसून तथा गूड़ जब बाजार में चला जाता है तो उसकी कीमत आसमान छूने लगती है।
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