मुहर्रम पर रविवार को शहर सहित जिले के विभिन्न हिस्सों से ताजिए निकाले गए और बाद में उन्हें कर्बला में दफन किया गया। जुलूस के दौरान लोगों ने हसन एवं हुसैन को याद करते हुए मातम किया। प्राय: सभी सड़कों पर दोपहर बाद से जुलूसों के चलते भीड़ बनी रही। कई ग्रामीण क्षेत्रों के ताजिए का जुलूस भी नगर से होकर गुजरा। नखास स्थित लकड़ी के टाल, रजदेपुर पुलिस चौकी और गोराबाजार में अगड़ी और पिछड़ी अखाड़ा के ताजियों की मिलनी हुई। भोर तक ताजियों को दफन करने का कार्य चलता रहा। इस दौरान फिजां में या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
शहर सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों का ताजिया जुलूस शहर के विशेश्वरगंज स्थित इमामबाड़े में पहुंचा। जुलूस में शामिल लोग या हुसैन की सदाएं लगाते हुए तथा मातम करते चल रहे थे। इसके बाद बारी-बारी से ताजिए को दफन किया गया। देर शाम शुरू हुआ ताजियों को दफन करने का कार्य भोर तक चलता रहा।
मुहम्मदाबाद संवाददता के अनुसार कोतवाली क्षेत्र में 38 स्थानों से निकलने वाली 67 ताजियों, भांवरकोल थाना क्षेत्र में 25 स्थानों से 35 एवं करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र में 20 स्थानों से 54 ताजिए देर रात तक अपने-अपने कर्बला में मातम एवं नौहाख्वानी के बाद दफन किए गए। यूसुफपुर बाजार में सड़क पर बनने वाले दो पूजा पंडालों के सामने के रास्ते से होकर सलेमपुर एवं दाउदपुर की ताजिया दफन के लिए गए।
सदर रोड पर सुबह में ताजिया निकाए गए। सलेमपुर, मलिकपुरा, दाउदपुर के ताजिए का जुलूस हाटा रोड़, मशीनरी रोड होते हुए बिठ्ठल चौराहा पर आकर जंजीर का मातम किया। अदिलाबाद, नवापुरा, यूसुफपुर की ताजिया पावर हाउस रोड से होते हुए गुड़ मंडी तिराहे पर मिलनी के समय ऐतिहासिक लठ लड़ाई हुई।
यूसुफपुर फाटक पर विभिन्न अंजुमनों के युवाओं ने जमकर जंजीर एवं ब्लेड से एवं नवापुरा में नौहाख्वानी पढ़कर जंजीर का मातम किया। मुहम्मदाबाद के कोट, भट्ठी मुहल्ले की ताजिया नौहाख्वानी पढ़ते हुए शाहनिंदा के पास स्थित कर्बला में, मिर्दहा, जफरपुरा आदि मुहल्ले की ताजिया डाक बंगले के पास स्थित कर्बला में देर रात दफन की गई।