गाजीपुर। जिले के कई गांवों में सैकड़ों हैंडपंप खराब पड़े हैं। लेकिन, इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि वर्तमान में गर्मी चरम पर है। ऐसे में ग्रामीणों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
जनपद में 1238 ग्राम पंचायतें हैं। गांवों में 20 लाख से अधिक की आबादी रहती है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों की ज्यादातर आबादी मध्यमवर्गीय या गरीब है। एक बड़ी आबादी को पेयजल का सहारा सार्वजनिक रूप से गांवों में लगे हैंडपंपों का रहता है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 2500 से अधिक हैंडपंप लगे हैं। कई गांवों में हैंडपंप तकनीकी खराबी आने के कारण खराब पड़े हैं। इसके कारण गरीब तबके के ग्रामीणों को पेयजल के लिए दूसरे हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ता है। कुछ लोग अपने पड़ोसियों से भी पेयजल ले रहे हैं, जिनके यहां सबमर्सिबल लगा है।
प्रभारी डीपीआरओ निलेंद्र सिंह ने बताया कि हैंडपंप मरम्मत का कार्य वर्ष भर होने वाला कार्य है। इसे लगातार किया जाता है। नियमित तौर पर ग्राम पंचायतें कराती हैं। जहां ऐसी समस्या आती है, प्रधान व सेक्रेटरी इसे कराते हैं। कोशिश रहती है कि प्राथमिकता के आधार पर खराब हैंडपंपों को दुरुस्त कराया जाए।