नोटबंदी को एक महीने हो गए हैं, मगर अब तक लोगों की परेशानी कम नहीं हुई है। लोगों का कहना है िक अगर बैंकों को एटीएम में पैसा ही नहीं डालना है तो फिर इसकी स्थापना क्यों कर दी गई। एक तरफ जहां पैसे के लिए मारीमारी है, वहीं अधिकतर एटीएम बंद है। नोट के लिए परेशानी की इस घड़ी में अगर एटीएम लोगों का पूरी क्षमता से साथ देते तो शायद एक-दो दिन में ही नोट के लिए परेशानियों का दौर समाप्त हो जाता। कुछ इसी तरह का कहना था एटीएम पर पैसे के लिए कतार में खड़े ग्राहकों का। इसमें कई ऐसे ग्राहक थे, जो पिछले चार-पांच दिनों से लाइन में खड़े हो रहे हैं और उन्हें पैसा नहीं मिल पा रहा है।
नोटबंदी के बाद से बैंकों के साथ ही एटीएम पर भी ग्राहकों का दबाव बढ़ गया, लेकिन शहर में लगे विभिन्न बैंकों के दर्जनों एटीएम लोगों की परेशानियों को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रहे हैं। जबसे 500 और 1000 के नोट को प्रतिबंधित किया गया है, तभी से शहर के अधिकांश एटीएम सफेद हाथी के रूप में नजर आ रहे हैं।
गुरुवार को शहर के मिश्रबाजार स्थित भारतीय स्टेट बैंक, महुआबाग स्थित यूनियन बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम पर उपभोक्ताओं की कतार लगी रही। सभी अपनी बारी के लिए बेचैन दिखाई दिए।
लाइन में खड़े शेखपुरा के शिवकुमार का कहना था कि चार-पांच दिनों से एटीएम की लाइन में खड़े हो रहे हैं, लेकिन नंबर आने से पहले ही पैसा समाप्त हो जा रहा है। नोटबंदी से नाराज ऊर्दू बाजार निवासी राजेश कुमार ने कहा कि अगर शहर के सारे एटीएम काम करते थे तो शायद लोगों को इतनी परेशानी नहीं होती, लेकिन सिर्फ तीन-चार एटीएम ही लोगों को अपनी सुविधा दे रहे हैं।
बरबरहना निवासी आदिल का कहना था कि बैंक ने नोटबंदी से निपटने के लिए ठोस इंतजाम नहीं किया। अधिकांश बैंकों में बड़ी मात्रा में अपने ग्राहकों को एटीएम कार्ड जारी कर रखा है, लेकिन दुर्भाग्य है कि सारे एटीएम काम नहीं कर रहे हैं। अगर सिर्फ दो दिनों तक नगर के सारे एटीएम काम करने लगे तो काफी हद तक करेंसी के लिए हो रही मारामारी कम हो जाएगी।