स्थानीय थाना परिसर में करीब 50 लाख की लागत से बनाए गए बहुमंजिला भवन में पुलिस कर्मी आधी-अधूरी सुविधाओं के बीच रहने को विवश हैं। कुछ कमरों और शौचालय के दरवाजे टूटे पड़े है तो पेयजल की दिक्कत है। करीब ढाई साल बाद भी इस भवन का निर्माण अधूरा एवं इसमें जरूरी सुविधाओं का टोटा बना हुआ है, जो कार्यदायी संस्था की लापरवाही को उजागर करता है। भवन का निर्माण बीते 2021 में शुरू हुआ था, जिसे 2022 तक बन जाना था। बावजूद इसके निर्माण में जुटी कार्यदायी संस्था के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही के चलते इस भवन को अभी तक न तो सुविधाओं से सुसज्जित किया जा सका है और नहीं विभाग को हैंड ओवर किया गया है। इसके कारण पुलिस कर्मी अभी भी किराए के मकान में रहने को विवश हैं।
मालूम हो कि वर्ष 2014 में चौकी से इसे थाने के रूप में तब्दील कर दिया गया था। लेकिन शुरू से ही यहां तैनात पुलिस कर्मियों को रहने के लिए आवास की कमी बनी रही। वहीं कार्यदायी संस्था की माने तो बहुत जल्द ही भवन को सुविधाओं से सुसज्जित कर महकमे को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
स्थानीय थाना क्षेत्र का यह इलाका सुरक्षा की दृष्टिगत संवेदनशील है। महकमे के अनुसार थाना के तहत कुल 18 गांव है, जिसमें 19 बीट और चार हल्के हैं। इस थाने पर 19 कांस्टेबल, चार हेड कांस्टेबल, नौ महिला आरक्षी, एक थानाध्यक्ष एवं दो एसआई हैं। थाना क्षेत्र के इन गावों की आबादी करीब डेढ़ लाख है।
इस संबंध में प्रांतीय खंड के एक्सईन शिशुपाल बौद्ध ने बताया कि इस बहुमंजिला भवन के छूटे हुए काम एवं उसमें शेष सुविधाओं को एक महीने में पूरा कर इसे महकमे को हैंड ओवर कर दिया जाएगा।