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दो वर्ष में भी छात्रावास अधूरे, समय बढ़ाया

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जनपद के आठ ब्लॉक के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय परिसर में छात्रावास का निर्माण कार्य दो साल में भी पूरा नहीं हो सका। करीब डेढ़ करोड़ में बनने वाले दो मंजिला छात्रावासों में 100 बालिकाओं के रहने की व्यवस्था होगी, लेकिन कार्यदायी संस्था की धीमी रफ्तार के चलते कहीं भी प्रथम तल से आगे काम नहीं बढ़ पाया है। स्थिति यह है कि सादात में अभी नींव का काम भी शुरू हुआ है।
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ऐसे ही कासिमाबाद में 15 फीसदी काम हो पाया है। जबकि अन्य ब्लॉकों में जमानिया में 70 फीसदी, रेवतीपुर में 60 फीसदी, देवकली में 60 फीसदी, सैदपुर में 75 फीसदी, जखनिया में 65 फीसदी और मरदह में 50 फीसदी निर्माण कार्य हो पाया है। शासन की ओर से बालिकाओं को छात्रावास की सुविधा मुहैया कराने के लिए अगस्त 2020 में कवायद शुरू हुई थी।
कार्यदायी संस्था को मार्च 2022 में छात्रावासों को तैयार कर विद्यालयों को सुपुर्द करना था, लेकिन काम पूरा नहीं होने से मार्च 2023 तक समयावधि बढ़ा दी गई है। बता दें कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से तमाम जतन किए जा रहे हैं। इस क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों का निर्माण कराया गया है। इनमें कक्षा छह से आठ तक की छात्राओं को मुफ्त आवासीय शिक्षा दी जा रही है।
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आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद रहने की समस्या आदि होने के कारण कई छात्राएं आगे की शिक्षा से वंचित हो जाती थी। उनकी इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इंटर तक की शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए विद्यालयों का उच्चीकरण एवं छात्रावास का निर्माण कराया जा रहा है। 100 बेड का छात्रावास (एक कक्ष में चार छात्राएं), वार्डेन एवं गार्ड रूम के अलावा पानी टंकी, शौचालय एवं मेस आदि का निर्माण प्रस्तावित है।
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छात्रावासों का निर्माण कार्य चल रहा है। अगले वर्ष मार्च तक पूरा करा लिया जाएगा। -हेमंत राव, बीएसए
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