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Ghazipur News: होली पर घर आना मुश्किल, स्पेशल ट्रेनों में भी बर्थ फुल

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सभी ट्रेनों में है लंबी वेटिंग, किसी भी श्रेणी में उपलब्ध नहीं है टिकट
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महानगरों से घर लौटना सबसे कठिन, कन्फर्म टिकट वाले भी परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर/ बारा। होली के त्योहार में अब कुछ ही दिन का समय बचा है। मुंबई, दिल्ली सहित दूसरे महानगरों से होली पर घर लौटना लोगों के लिए मुश्किलों भरा साबित हो रहा है। ट्रेनों में लंबी वेटिंग मिल रही है। किसी भी श्रेणी में टिकट उपलब्ध नहीं है। टिकट कन्फर्म न होने के कारण लोग वेटिंग टिकट पर ही यात्रा करने को विवश हैं। ऐसे में कन्फर्म टिकट वाले यात्री भी परेशान हैं, वजह एक सीट पर पांच से सात यात्री जैसे तैसे अपनी यात्रा पूरी कर अपने गंतव्य स्थान तक पहुंच रहे हैं।
होली एक ऐसा त्योहार है, जिसे हर व्यक्ति अपने परिवार के साथ मनाना चाहता है। रोजी - रोटी और जीविकोपार्जन की तमाम परेशानियों के चलते बहुत से लोग अपने घर से दूर रहते हैं। होली के मौके पर सबकी तमन्ना होती है कि वो भी अपने परिवार के साथ यह त्योहार मनाएं, लेकिन आमतौर पर इस मौके पर सबसे बड़ी परेशानी रेल टिकटों को लेकर होती है।
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लंबी दूरी की ट्रेनों में वेटिंग से परेशान हो रहे यात्री
बारा। त्योहार पर रेलवे ने कई होली स्पेशल ट्रेनों का परिचालन शुरू किया, लेकिन भारी भीड़ के कारण किसी भी ट्रेन में बर्थ खाली मिल पाना असंभव है। भारी भीड़ का एक मुख्य कारण यह भी है कि कई वर्षों के बाद लोग कोरोना के डर से निकलकर त्योहार मना रहे हैं। कोरोना और सोशल डिस्टेसिंग की वजह से पिछले कई वर्षों से लोग पर्व मनाने अपने घरों को नहीं पहुंच सके थे। लेकिन इस बार कोरोना की सामान्य स्थिति होने से त्योहारों पर घर पहुंचने वाले लोगों की अतिरिक्त भीड़ ने परेशानी बढ़ा दी है। होली में पटना - डीडीयू रेलखंड के बक्सर स्टेशन पर पंद्रह जोड़ी ट्रेनों का ठहराव किया गया है। लेकिन इन ट्रेनों में बर्थ भर चुके हैं। ऐसे में यात्रियों को काफी असुविधा हो रही है।
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घोषणा के पहले दिन इन स्पेशल ट्रेनों के बर्थ फुल
डॉ. आंबेडकर नगर - पटना - डॉ. आंबेडकर नगर सुपर फास्ट स्पेशल
दिल्ली - बरौनी साप्ताहिक स्पेशल
कोटा - दानापुर - कोटा होली स्पेशल
अगरतला - रानी कमलपति स्पेशल
समस्तीपुर - लोकमान्य तिलक स्पेशल
रानी कमलपति - पटना स्पेशल
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स्लीपर कोच घटाए, बढ़ाए गए एसी...निम्न वर्ग की समस्या बढ़ी
बारा। सबसे ज्यादा परेशानी विभिन्न गांवों से देश भर के विभिन्न राज्यों में मजदूरी कर कमाने वाले लोगों को हो रही है। वे ना तो खुद से ऑनलाइन तत्काल कोटे में टिकट बुक करने में सक्षम हैं और ना ही अधिक पैसे देकर एसी में यात्रा करने के योग्य। इन सभी दिक्कतों के अलावा एलएचबी कोचों के नाम पर रेलवे ने हर ट्रेन से स्लीपर डिब्बों को घटा दिया है और एसी को बढ़ा दिया गया है। पुराने 12 से 14 स्लीपर डब्बे युक्त रैक में अब 6 से 7 स्लीपर डब्बे ही लगाए जा रहे हैं। ऐसे में रेल यात्री 36 घंटों की रेल यात्रा शौचालय के पास बैठकर करने को विवश हैं।

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पांच घंटे लेट से पहुंची मेल, यात्रियों को हुई परेशानी
बारा। ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री पूरी तरह से परेशान हैं। स्टेशन पर उन्हें प्रतीक्षा में घंटों समय गुजारनी पड़ रही है। खासकर अमृतसर - हावड़ा मेल के रेल यात्रियों को। मालूम हो कि पिछले कई दिनों से इस ट्रेन का यही हाल है। गहमर स्टेशन पर मंगलवार को जहां सात तो बुधवार को पांच घंटे की देरी से पहुंची थी।
जबकि बृहस्पतिवार को अमृतसर - हावड़ा मेल पांच घंटे की देरी से पहुंची। ऐसे में रेल यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यही हाल विभूति एक्सप्रेस की भी रही। यह ट्रेन गहमर स्टेशन पर 8.06 बजे पहुंचती है। जो अपने निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से चलने की सूचना रही। ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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गहमर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक की कुर्सियों के साथ प्रतीक्षालय में देर रात तक बैठकर यात्रियों को ट्रेन के आने का इंतजार करना पड़ रहा है। स्टेशन के पूछताछ काउंटर पर यात्रियों की भीड़ ट्रेनों के समय के बारे में जानने के लिए जुट रही है, लेकिन ट्रेन किस कारण से लेट है कोई बताने वाला नहीं है। संवाद
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