बेसिक शिक्षा के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का लेखन कौशल निखारने एवं उनकी रचनात्मकता बढ़ाने के लिए हिंदी सुलेख प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
22 फरवरी को होने वाली प्रतियोगिता में कक्षा तीन से आठ तक के छात्र-छात्राएं भाग लेंगे। इनको दो श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली कक्षा तीन से पांच तक और दूसरी श्रेणी में छह से आठवीं तक प्रतियोगिता होगी।
वर्षों पहले परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में सुलेख और इमला के माध्यम से ज्ञान की नींव डाली जाती थी। इससे बच्चे शब्दों का सही उच्चारण करते थे और उनकी भाषा लिखने और बोलने में शुद्ध होती थी लेकिन कई वर्षों से सरकारी विद्यालयों में इमला और सुलेख की परंपरा खत्म हो गई है। शिक्षक भी इससे कतरा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में छात्र सुलेख और इमला के बारे में जानते ही नहीं हैं।
इसका नतीजा यह है कि विद्यार्थी बोलते और लिखते समय कई गलतियां करते हैं। इस कारण वर्तमान समय में अधिसंख्य बच्चे शब्दों का उच्चारण तक सही तरीके से नहीं कर पाते।
बोलते समय ही नहीं, लिखने में भी बड़ी-बड़ी गलतियां करते हैं। इमला और सुलेख फिर से शुरू हुआ तो इससे बच्चों की भाषा में बड़ा सुधार आएगा।