प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वन विभाग की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों किनारों पर लगाए गए पौधों का अस्तित्व खत्म हो गया है। पौधों की सुरक्षा के लिए बनाए गए ट्री-गार्ड ध्वस्त हो गए हैं। वन विभाग के प्रमुख सचिव सुनील पांडेय
के निर्देश के बाद भी इन पौधों की सुरक्षा पर गंभीरता नहीं दिखाई गई, जबकि इस मद में बजट भी पास हुआ था।
वन विभाग के प्रमुख सचिव सुनील पांडेय ने विभिन्न जिलों में राजमार्गों व अन्य सड़कों के किनारे पौधे लगाने और
सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड बनाने का निर्देश दिया था। इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए थे। आबादी या सुनसान जगहों पर पौधे लगाने का आदेश गत माह दिया गया था। प्रत्येक क्षेत्र में 200 पौधे दस-दस मीटर की दूरी पर रोपने और
पौधे की लंबाई 12 फीट का होने के साथ ही एक मीटर चौड़ा और पांच फीट ऊंचा ट्री गार्ड बनाने का निर्देश जारी किया था। इसके तहत कुल 2700 पौधे रोपने और ट्री गार्ड के लिए कुल लगभग 30 लाख रुपये शासन से जारी हुए थे।
उधर, ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रोपे गए पौधों और ट्री-गार्डों के निर्माण में मानक की अनदेखी की गई। दोयम दर्जे की ईंटों व मोरंग गंगा नदी से निकलवाकर उसमें नाममात्र सीमेंट मिलाकर ट्री गार्ड बनाया गया है। कई स्थानों पर ट्री गार्ड
ध्वस्त हो गए हैं जबकि कई स्थानों पर ट्री-गार्ड बनाए ही नहीं गए हैं। इस संबंध में डीएफओ एच राजा मोहन का कहना है कि शासन के मानक के विरुद्ध काम पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। कहा कि वह खुद निगरानी करेंगे।