एआरटीओ कार्यालय पर लाइसेंस बनाने, वाहनों का टैक्स जमा कराने, रजिस्ट्रेशन कराने आदि काम से पहुंचने लगे थे। कुछ लोग अपना काम कराने के लिए दलालों को तलाश रहे थे तो कुछ लोग सीधे काउंटर पर पहुंचे, लेकिन उनको समझा-बुझाकर वापस भेज दिया गया। मजबूरन उन्हें भी अपने काम के लिए दलालों को पकड़ना पड़ा। कई लोग एआरटीओ से मिलने के लिए साढ़े दस बजे पहुंचे थे, लेकिन साहब की कुर्सी खाली थी। एआरटीओ ठीक 11.14 बजे कार्यालय पहुंचे। किसी भी काम के लिए कार्यालय में अंदर से बाहर तक केवल दलाल ही सक्रिय दिखे।
शुक्रवार को दिन में 10.30 बजे से एआरटीओ विभाग में कामकाज शुरू हुआ। कार्यालय खुलते ही 10.10 बजे एक साथ दो बाबू आए। इसके बाद एक-एक कर सभी 10.20 बजे तक कार्यालय पहुंचे, जबकि एक बाबू पूरे दिन के लिए छुट्टी ले चुके थे। विभिन्न काउंटरों पर काम शुरू हो गया था। 11 बजे के बाद एआरटीओ भवानीदीन भी पहुंचे।
एआरटीओ आफिस में पैर रखते ही जगह-जगह दलालें की दूकान लगी थी। लोग उनके पास जाकर अपना-अपना मोल-भाव करते दिखे। इस भीड़ में बहरियाबाद निवासी असलम खां भी थे। वह कई दिनों से लाइसेंस बनवाने के लिए चक्कर लगा रहे थे। दिन के साढ़े ग्यारह बजे कार्यालय के उत्तरी तरफ एक दलाल के टेबल पर पहुंचकर चिरौरी-विनती की कहा कि मेरे परिवार के एक सदस्य का लाइसेंस बनाना है। दलाल ने लाइसेंस के लिए 1000 रुपये देने को कहा और वह 400 रुपये तक देने को तैयार थे। एक स्थान पर मामला तय नहीं हुआ तो दूसरी जगह पहुंचे, वहां 800 तक पर लाइसेंस बनाने का ठेका दलाल ने ले रहा था। अंतत: वह कल लाइसेंस बनाने की बात कह चले गए।
इसी प्रकार वाहन दूसरे के नाम ट्रांसफर कराने को लेकर 3000 रुपये तक मांगा जा रहा था और तत्काल काम कराने की बात कही जा रही थी। इतना ही नहीं दलाल अपना संबंध साहब से काफी घनिष्ठ बता रहा था। इसी प्रकार शेखपुरा निवासी विक्की भी मुख्य गेट के पूर्वी हिस्से में बैठे एक दलाल से संपर्क कर लाइसेंस बनवाने की बात की। वह फार्म लेकर कई दिनों से दौड़ रहा है, लेकिन कर्मचारी लाइसेंस बनाने में हीलाहवाली कर रहे थे। इससे परेशान हो वह 800 रुपये दे दिया।
सबसे अधिक भीड़ ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और फोटो खिंचवाने वालों की थी। कई युवा तथा छात्र कम पैसा होने के कारण लाइसेंस बनवाने के लिए हाथ में फार्म लेकर इधर-उधर दौड़ते नजर आए। कई लोग दलालों से काम कराने के लिए मोल-भाव करते नजर आए।
कई लोग इस बात से निराश दिखे कि काफी समय से विभाग का चक्कर लगाने के बावजूद उनका काम नहीं हो रहा है। विभागीय अफसर, कर्मचारी तथा बाबू सभी सब कुछ जानते हुए खामोश हैं। दलालों पर शिकंजा कसने के लिए कई बार यहां औचक छापेमारी की गई और कार्रवाई के लिए चेताया गया, लेकिन आज भी विभाग में वही हो रहा है, जो दलाल चाहते हैं।
एआरटीओ कार्यालय में नौ बाबू सहित कुल 12 कर्मचारियों की तैनाती हैं। दिन के सवा 10 बजे सभी कर्मचारी कार्यालय में तैनात थे और अपने-अपने कार्यों में लगे हुए थे, लेकिन बाबू कृपा सिंह की कुर्सी खाली थी। इस संबंध में पूछे जाने पर एआरटीओ भवानी दीन ने बताया कि सुबह कृपा सिंह ने किसी काम की वजह से फोन से न आने की सूचना दी थी।